पूरी तरह से तालाब ही है बतुकम्मा कुंटा : ए.वी. रंगनाथ
हैदराबाद, नगर के अंबरपेट स्थित बतुकम्मा कुंटा को लेकर चल रही अटकलों और विवादों के बीच हैद्रा के आयुक्त एवी रंगनाथ ने कहा कि बतुकम्मा कुंटा पूरी तरह से एक तालाब है। उन्होंने इस दावे के समर्थन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड, सैटेलाइट चित्र और गूगल मैप्स के प्रमाण भी मीडिया के सामने पेश किए।
हैद्रा आयुक्त कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रंगनाथ ने बताया कि वर्ष 1975 के सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में भी इस क्षेत्र को तालाब के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि सर्वे नंबर 563/1 में करीब 9.19 एकड़ क्षेत्र में तालाब मौजूद होने की पुष्टि राजस्व और जीएचएमसी रिकॉर्ड से होती है।
तालाब पर स्वामित्व विवाद, निर्माण पर रोक
वहीं, सर्वे नंबर 563/2 में 6 गुंटा क्षेत्र में ‘मासान कट्टा’ (बांध) का उल्लेख भी दर्ज है। उन्होंने 1971 के सर्वे ऑफ इंडिया की फोटो और 1989 के नासा (लैंडसैट) द्वारा लिए गए सैटेलाइट चित्र भी जारी किए। इन सभी दस्तावेजों और वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए वीडियो प्रस्तुति भी दिखाई गई। हैद्रा आयुक्त ने बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक कोई भी व्यक्ति इस भूमि पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता है।
इसी के चलते वहां लगाए गए गेट और बोर्ड हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तालाब के चारों ओर लगी फेंसिंग हटाने से दुर्घटनाओं की आशंका है, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में भी जानकारी दी गई। कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि तालाब निजी या सरकारी श्रेणी में नहीं आते, बल्कि ये पूरी तरह जनता की संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि पानी कम होने पर अस्थायी खेती की अनुमति हो सकती है, लेकिन तालाब के स्वरूप को बदलना या निर्माण कार्य करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
कुछ स्थानों पर गेटेड कम्युनिटी द्वारा तालाब तक पहुंच रोकने की शिकायतों के बाद यह स्पष्टीकरण दिया गया। उन्होंने कहा कि नगर के तालाबों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए व्यापक योजना शुरू की गयी है। पहले चरण में 6 तालाबों का पुनरुद्धार किया जा रहा है, जिनमें से 3 पर काम शुरू हो चुका है।
तालाब अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज
दूसरे चरण में 14 तालाबों को शामिल किया गया है, जबकि 4 बड़े तालाबों के विकास की भी योजना है। सरकार कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के जरिए इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। आयुक्त ने कहा कि तालाबों के आसपास अतिक्रमण हटाने के दौरान जिन गरीबों के घर प्रभावित होंगे, उन्हें सरकार डबल बेडरूम आवास उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
हाल ही में माधापुर के सुत्रम चेरुवु और उप्पल के रामंतापुर तालाब क्षेत्र के प्रभावित लोगों का पुनर्वास किया गया। रंगनाथ ने बताया कि अब तक कुल 2093 एकड़ जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है। इसमें तालाब एफटीएल क्षेत्र से 296.12 एकड़, नालों के पास 24.05 एकड़, सरकारी भूमि 1606.34 एकड़, पार्कों की 92.24 एकड़, सड़कों की 49.28 एकड़, सार्वजनिक उपयोग की 23.17 एकड़ भूमि शामिल हैं।
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इन जमीनों की अनुमानित कीमत करीब 85 हजार करोड़ रुपये आंकी गई। उन्होंने बताया कि विभिन्न मामलों में अब तक 90 से ज्यादा केस दर्ज किए गए हैं। संबंधित विभागों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में कार्रवाई तेज थी, लेकिन अब कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पहले नोटिस देकर पर्याप्त समय दिया जा रहा है। अवसर पर अतिरिक्त निदेशक वर्ला पापय्या, अतिरिक्त आयुक्त आर. सुदर्शन व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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