फरहान अख्तर के डीएनए में है देशप्रेम

शायर व इस्लामी विद्वान अल्लामा फ़ज़ल-ए-ह़क खैराबादी ने 1857 में ब्रिटिश सरकार के खिल़ाफ सैन्य विद्रोह करने का फतवा जारी किया था, जिसके लिए उन्हें काला पानी की सज़ा दी गई। वह अंडमान में कैद किये जाने वाले शुरुआती स्वतंत्रता सैनानियों में से थे, जहाँ उन्होंने 1857 की घटनाओं से संबंधित सबसे पहली पुस्तक (थोरात-अल-हिंदिया) लिखी। उनका 19 अगस्त 1861 को अंडमान में कैद में रहते हुए ही निधन हुआ।

फ़ज़ल-ए-ह़क खैराबादी के पुत्र विख्यात शायर मुज़्तर खैराबादी थे, जो एक अन्य चर्चित शायर जांनिसार अख्तर के पिता थे। जांनिसार अख्तर के बेटे फिल्म पटकथा लेखक व गीतकार जावेद अख्तर हैं, जो ऐक्टर-गायक-निर्देशक फरहान अख्तर के पिता हैं। इस तरह फरहान अख्तर को देशप्रेम व शायरी विरासत में मिली है। फरहान अख्तर के लिए आज़ादी व देशप्रेम नारा या दिखावा नहीं है बल्कि आस्था और ज़िम्मेदारी भरा कार्य है।

इसलिए उन्होंने अपनी फिल्मों- लक्ष्य (2004), भाग मिल्खा भाग (2013) व 120 बहादुर (2025) में देशप्रेम को शोर-गुल के रूप में पेश नहीं किया बल्कि इतिहास का जश्न मनाया ताकि हमारे ऐतिहासिक हीरो वर्तमान के लिए प्रेरणा बनें और भारत की प्रगति में अपना भरपूर योगदान दें। फरहान अख्तर की उक्त फिल्मों में नायकों की व्यक्तिगत यात्राएं देशप्रेम व युद्ध की पृष्ठभूमि के ताने-बाने में बुनी हुई हैं।

फरहान अख्तर के अनुसार देशप्रेम: अनुभव, प्रेरणा और जिम्मेदारी

फरहान अख्तर का कहना है, यह फिल्में मेरी दृष्टि से देशप्रेम को परिभाषित करती हैं, जिसकी मैं घोषणा नहीं करता हूँ, लेकिन गहराई से महसूस करता हूँ। मेरे लिए देशप्रेम अपने पैरेंट्स से प्रेम करने जैसा है। आपको लोगों को बताना नहीं पड़ता है कि आप उन्हें प्यार करते हो। आप उस प्यार के साथ जन्म लेते हैं। फरहान अख्तर के अनुसार संसार बदल रहा है और आप चाहते हैं कि आपका देश भी बदलते हुए समय के साथ आगे बढ़े।

सोच बदलनी चाहिए। देश अपने सबसे अच्छे रूप में विकसित तभी हो सकता है, जब हम उसे विरासत के रूप में नहीं बल्कि उसका भविष्य सुनहरा बनाने की ज़िम्मेदारी के तौरपर देखें। जब मैं लक्ष्य, भाग मिल्खा भाग या 120 बहादुर जैसी फिल्में करता हूँ तो उद्देश्य लोगों को उस तरह प्रेरित करना होता है जैसा इन कहानियों को सुनते हुए मैं प्रेरित हुआ था। इन्हें करने का यही मुख्य कारण था। फरहान अख्तर न्यून-कथित को प्राथमिकता देते हैं।

120 बहादुर’: देशप्रेम और साहस की सच्ची कहानी

जैसा कि फिल्म दिल चाहता है (2001) में था। वह एहसास था, शोर नहीं और इसी वजह से दर्शकों ने उसे अपनी कहानी महसूस किया। फरहान अख्तर का मानना है कि अगर आप कोई बात बार-बार दोहराते हैं ताकि लोग उसे मानने लगें, तो आप स्वयं उस बात पर विश्वास नहीं करते हैं। इसलिए देश प्रेम एहसास है, नारा नहीं। वह कहते हैं, देश प्रेम के संदर्भ में सबसे पहली बात हमारे दिमाग में यह आनी चाहिए कि हम अपने देश को स्वच्छ रखें। सिविक सेंस बहुत महत्वपूर्ण है। इस बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि मेरा घर तो स्वच्छ रहे, लेकिन सड़कें गंदी रह सकती हैं।

120 बहादुर की पृष्ठभूमि में 1962 का भारत-चीन युद्ध है। यह उन बहादुरों का जश्न है, जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानियां केवल देशप्रेम की खातिर दीं। यह वह अध्याय है, जो बहुत से युवाओं के लिए कसौटी बनी और वह सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित हुए। यह फिल्म अविश्वसनीय सच्ची कहानी है मेजर शैतान सिंह भाटी की जो रेज़ंग ला में 3,000 चीनी सैनिकों के खिलाफ 120 भारतीय सैनिकों का नेतृत्व करते हैं।

फरहान अख्तर और मिल्खा सिंह: समर्पण और प्रेरणा की कहानी

यह फिल्म इन 120 बहादुरों के सामूहिक साहस का दस्तावेज़ है, अत्यधिक विशाल कठिनाई के सामने। यह प्रेरणा से भी बढ़कर है। अगर कोई किसी कार्य के प्रति पूर्णत समर्पित है, तो वह आपको सोचने पर मजबूर करता है कि मैं क्या कर रहा हूँ? एक कलाकार के रूप में फरहान अख्तर ऐसे ही समर्पण की तलाश करते हैं। भाग मिल्खा भाग के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा के लिए मिल्खा सिंह वैसे ही थे, जैसे आज की पीढ़ी के लिए विराट कोहली या सचिन तेंदुलकर हैं- प्रेरणा।

फरहान अख्तर की परवरिश मिल्खा सिंह, शैतान सिंह की दास्तानें सुनते हुए हुई। उनके स्कूल में पीटी टीचर थे दूबे जी, जिनके चरित्र को ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा में स्पर्श किया गया था। दूबे उस पीढ़ी के व्यक्ति थे, जिसने मिल्खा सिंह व शैतान सिंह की महानता को फर्स्ट-हैंड महसूस किया था और वह उनकी कहानियां अपने छात्रों को सुनाया करते थे। फरहान अख्तर उन्हीं कहानियों से प्रेरित हैं अपने देशप्रेम के लिए, वैसे भी फ़ज़ल-ए-ह़क के वंशज को देशप्रेम विरासत में मिला है। वह उनके डीएनए में है।

-कैलाश सिंह

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button