प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना के पुनरुद्धार के लिए तकनीकी प्रस्ताव की तैयारी तेज़

हैदराबाद, राज्य सरकार ने प्राणहिता-चेवेल्ला लिफ्ट सिंचाई परियोजना के पुनरुद्धार के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार के साथ तुम्मिड़िहट्टी बैराज निर्माण पर होने वाली चर्चा के लिए विस्तृत योजना और तकनीकी प्रस्ताव तैयार करने के अधिकारियों को निर्देश दिए।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तम कुमार ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि योजना बनाते समय महाराष्ट्र क्षेत्र और चपराला वन्यजीव अभयारण्य में संभावित जलमग्न होने वाले क्षेत्र को न्यूनतम रखा जाए। प्रभावित क्षेत्रों के लिए तेलंगाना मुआवज़ा देने को तैयार रहेगा। महाराष्ट्र सरकार पहले ही 148 मीटर ऊँचाई पर सहमति दे चुकी है और कम लागत वाले, जहाँ संभव हो, गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रवाह के साथ संतुलित निर्माण पर ज़ोर दिया गया है।

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तकनीकी अध्ययन और आर्थिक व्यवहार्यता पर जोर

मंत्री ने कहा कि भविष्य के सभी निर्णय और संवाद व्यापक अध्ययन, तकनीकी गुणवत्ता और आर्थिक व्यवहार्यता पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अंतर-राज्यीय वार्ताओं से पहले पूर्ण दस्तावेज़, वैकल्पिक एलाइनमेंट, लागत-लाभ विश्लेषण और भू-तकनीकी विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। विभाजन से पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार के तहत परिकल्पित की गई प्राणहिता नदी (गोदावरी की सहायक) पर तुम्मिड़िहट्टी में बाँध बनाकर पानी को मुख्यत गुरुत्वाकर्षण नहरों और न्यूनतम लिफ्ट के माध्यम से आदिलाबाद जैसे ऊपरी क्षेत्रों तथा आगे चलकर येल्लमपल्ली जलाशय के जरिए रंगारेड्डी (चेवेल्ला अंतिम छोर क्षेत्रों) तक पहुँचाने की योजना थी।

इसका लक्ष्य लगभग 2 से 2.5 लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई करना था, जिसमें प्रारंभिक मोड़ के बाद प्राकृतिक प्रवाह का अधिक उपयोग कर परिचालन लागत कम रखना शामिल था। पुनरुद्धार प्रयास अब मौजूदा उपयोगी ढाँचे को समाहित करते हुए लागत अनुकूलन और येल्लमपल्ली तक गुरुत्वाकर्षण प्रवाह को प्राथमिकता देने पर केंद्रित है। तुम्मिड़िहट्टी से येल्लमपल्ली और आगे सुंदिल्ला को जोड़ने के लिए चार वैकल्पिक एलाइनमेंट प्रस्तावों पर आईआईटी हैदराबाद और आरवी असोसिएट्स के विशेषज्ञ सक्रिय रूप से अध्ययन कर रहे हैं।

इन अध्ययनों का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण कम करना, पंपिंग की आवश्यकता घटाना, सुरंग व नहरों की लंबाई कम करना, समग्र व्यवहार्यता और दक्षता बढ़ाना है। तुम्मिड़िहट्टी स्थल पर भू-वैज्ञानिक और भू-तकनीकी सर्वेक्षण तेज़ी से किए जा रहे हैं। मंत्री ने कालेश्वरम के मेडीगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला बाँधों की तत्काल मरम्मत मानसून से पहले करने के निर्देश दिये हैं।

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