ज़मीनी स्तर पर हो समस्याओं का त्वरित समाधान : टीएसएफसीसीटी
हैदराबाद, तेलंगाना स्टेट फेडरेशन ऑफ चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड ट्रेड (टीएस एफसीसीटी) ने आर्थिक वृद्धि को गति देने और बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पेश किए गए बजट का स्वागत करते हुए कहा कि बजट में व्यापारियों की ज़मीनी स्तर की समस्याओं के समाधान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
टीएसएफसीसीटी अध्यक्ष अम्मनबोलु प्रकाश ने सिकंदराबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारी रोजगार सृजन, जीएसटी राजस्व और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता के प्रमुख चालक हैं, फिर भी नीति-निर्माण और परामर्श प्रक्रिया में उनका प्रतिनिधित्व सीमित है। जीएसटी से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डालते उन्होंने कहा कि बार-बार नोटिस आना, रिटर्न में विसंगतियाँ, दंड का भय और इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड में देरी व्यापारियों की कार्यशील पूँजी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। उन्होंने सरकार से छोटे व्यापारियों के लिए त्रैमासिक जीएसटी रिटर्न की व्यवस्था करने, तेज और स्वचालित रिफंड सुनिश्चित करने तथा व्यापारी-अनुकूल जीएसटी हेल्प डेस्क स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि अनुपालन संबंधी आवश्यकताएँ असमान रूप से बोझिल हैं, जहाँ छोटे व्यापारियों को वही नियामकीय भार उठाना पड़ता है। छोटे टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए सरल अनुपालन मानदंड तत्काल आवश्यक हैं।
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एकल वार्षिक लाइसेंस की माँग, छिपे कर बोझ पर चिंता
अध्यक्ष ने व्यापारियों के लिए एकल वार्षिक लाइसेंस प्रणाली की माँग करते हुए कहा कि व्यापारियों पर अनेक स्थानीय करों, लाइसेंस, नवीनीकरण शुल्क और निरीक्षणों के रूप में छिपा हुआ कर बोझ बना हुआ है, जिससे उत्पीड़न की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण से पहले व्यापारियों से शायद ही कभी परामर्श किया जाता है, जिससे नीतिगत धारणाओं और स्थानीय बाजार की वास्तविकताओं के बीच अंतर पैदा हो जाता है। उन्होंने संवाद को संस्थागत रूप देने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर व्यापारी सलाहकार परिषदों के गठन का प्रस्ताव रखा।
अध्यक्ष ने शहरी बाजार अवसंरचना की उपेक्षा की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें पार्किंग, वेयरहाउसिंग, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता और डिजिटल सुविधाएँ शामिल हैं। जागरूकता और पहुँच बढ़ाने के लिए उन्होंने व्यापारियों हेतु एक अलग समर्पित पोर्टल की सिफारिश की, जिसमें सब्सिडी, ऋण योजनाएँ और सरकारी सहायता कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध हो। फेडरेशन ने छोटे व्यापारियों को दिए जाने वाले ऋणों पर ब्याज सब्सिडी की भी माँग की। उन्होंने कहा कि व्यापारी आर्थिक वृद्धि के भागीदार हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का प्रभाव दुकान के स्तर तक पहुँचना चाहिए। विकासोन्मुख नीतियों के साथ जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और सार्थक परामर्श भी होना चाहिए। अवसर पर सिकंदराबाद क्लॉथ मर्चेंट असोसिएशन के संजय और ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेल्स डोमेस्टिक काउंसिल के निदेशक मोहनलाल जैन उपस्थित थे।
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