महेश बैंक चुनाव में संस्थापक पैनल के पक्ष में रमेश कुमार बंग ने दिया आरोपों का मुँहतोड़ जवाब
हैदराबाद, महेश बैंक चुनाव का प्रचार अपने अंतिम दौर में पहुँच चुका है। मौजूदा नेतृत्व पर आये दिन नये आरोप मढ़े जा रहे हैं। इन सबके बीच संस्थापक पैनल नित नये क्षेत्रों का दौरा कर बैंक को अभूतपूर्व ऊँचाई पर ले जाने के लिए अपने विजन से अंशधारकों को अवगत कराने में जुटा है। बैंक के चेयरमैन रमेश कुमार बंग ने प्रचार अभियान के बीच मिलाप से बातचीत में अपनी नीतियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश-
प्रश्न : हर बार ढेर सारे आरोप लगने के पश्चात भी आप कैसे जीत जाते हो?
उत्तर : झूठे आरोपों को अंशधारक पहचानते हैं। उन्हें जिस पर विश्वास है उसी को बैंक की बागडौर सौंपते हैं। 1978 में हमारे पूर्वजों ने अथक मेहनत से इस बैंक की स्थापना की। उनकी कड़ी मेहनत व लगन का ही परिणाम है कि उन्होंने 2005 तक बैंक को 500 करोड़ के व्यापार तक पहुंचाया। 2005 से अंशधारकों ने संस्थापक पैनल पर विश्वास किया और इस प्रकार मैं बैंक का चेयरमैन बना। इस चुनाव में भी विपक्षी पैनल के 5 सदस्य विजयी हुए थे और मेरे आग्रह पर वे सब पैनलबाजी भूलकर बैंक के विकास के लिए एक हो गए, जिसका सुखद परिणाम आप लोगों ने देखा।
प्रश्न : चुनाव पहले भी होते थे और आज भी हो रहे हैं, दोनों में क्या फर्क है?
उत्तर : चुनाव पहले भी होते थे और आज भी हो रहे हैं, लेकिन पहले चुनावों में मर्यादाएँ होती थीं। 2020 के चुनावों में सभी मर्यादाएँ समाप्त हो गयीं, झूठ द्वारा सच्चाई को दबाने का पूरा प्रयत्न किया गया। इन लोगों को चुनावों के पूर्व ही आभास हो गया कि वे जीत नहीं सकते, क्योंकि अंशधारकों को उन पर भरोसा नहीं है। वे भविष्य में भी जीत नहीं पाएंगे तो उन्होंने गंदी चालें चलने का कार्य आरम्भ कर दिया।
एक असोसिएशन बनाकर विभिन्न सरकारी महकमों में निदेशकों व बैंक के खिलाफ कई आरोप लगाकर अर्जियाँ दी गयीं। विगत चुनाव में भी उन्होंने हम पर अनर्गल झूठे आरोप लगाए। इस बार तो उनकी हरकतें देख मन आहत हो रहा है। अबकी तो उन्होंने ठान रखी है कि अगर हम नहीं जीतेंगे तो हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित इस बैंक के अस्तित्व को ही समाप्त कर देंगे। उनकी गंदी मानसिकता को अंशधारक समझ रहे हैं और वे इस चुनाव में उन्हें उचित सबक सिखायेंगे।
प्रश्न : आप पर आरोप है कि आपके कार्यकाल में 300 करोड़ का लोन फ्रॉड हुआ है?
उत्तर : यह सरासर झूठ है। ऐसा कोई फ्रॉड नहीं हुआ। वकीलों से परमार्श के पश्चात लोन सेक्युरिटी देख कर ही दिए गए। कोई भी लोन वक्फ प्रॉपर्टी अथवा बेनामी सम्पत्ति पर नहीं दिए गए। आरबीआई या अन्य महकमों अथवा कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑफिसर ने कहीं भी किसी तरह की उपरोक्त गड़बड़ी नहीं पायी और ना ही अपनी रिपोर्टों में कहीं उल्लेख किया।
प्रश्न : केन्द्राय कार्यालय के भवन निर्माण में आर्थिक लेन-देन में हेरा-फेरी का आरोप है।
उत्तर : इस निर्माण में किसी भी सरकारी महकमे द्वारा अपनी रिपोर्ट में कहीं भी आरोपों को सही नहीं माना गया है। अगर कोई गड़बड़ होती तो उनकी रिपोर्टों में उल्लेख जरूर रहता, जो बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में भी छपता।
प्रश्न : सन् 2020 में गोल्ड लोन लेने वालों को आपने वोटिंग पॉवर दिये, क्या यह सही है?
उत्तर : यह आरबीआई और मल्टीस्टेट एक्ट के नियमों के अनुसार है। गोल्ड लोन दिये गये व बैंक के सदस्य बनाए गए। इस वर्ष भी गोल्ड लोन के सदस्य बने जिसे बैंक के अधिकारियों व इलेक्शन रिटर्निग ऑफिसर ने मान्यता दी है और वोटर लिस्ट में जोड़ा है।
प्रश्न : आपको आरबीआई ने क्या कारण बताओ नोटिस दी थी और उसका क्या परिणाम रहा?
उत्तर : वर्तमान निदेशक मण्डल के पाँच सदस्यों द्वारा की गयी शिकायत के आधार पर आरबीआई द्वारा कारण बताओ नोटिस मिली कि क्यों न आपको चेयरमैन व निदेशक पद से हटाया जाए। मेरे जवाब से संतुष्ट होकर आरबीआई ने अपने 28 अगस्त 2023 के आदेश में मामले को समाप्त कर दिया और कोई ऐक्शन नहीं लिया।
प्रश्न : बैंक को प्रगति पथ पर ले जाने में आपको क्या मुश्किलें आ रही हैं?
उत्तर : 2010 के चुनावों के पश्चात इन्हें लगा कि उनके बतलाए गए झूठ के कारण वे किसी भी सूरत में भावी इलेक्शन जीत नहीं पायेंगे तो 2015 के पश्चात इन्होंने रणनीति बनानी शुरू कर दी। एक वेल्फेयर असोसिएशन नामक संस्था बनाई और उसके द्वारा कई झूठे आरोप विभिन्न सरकारी एजंसियों को प्रेषित किए। कहीं भी इनकी दाल नहीं गली। किसी भी सरकारी संस्था ने महेश बैंक के खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं दी। इस हार से वे और बौखला गए। 2020 के चुनावों में अंशधारकों ने फिर से उन पर विश्वास नहीं किया, तब उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया, ईडी का सहारा लिया। कई केस डाले गये। उन सभी मामलों की जांच चल रही है और जाँच के चलते मैं उन पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं करना चाहता।
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प्रश्न : विपक्ष का रहना अच्छा है या नहीं?
उत्तर : विपक्ष का हर जगह होना जरूरी है, लेकिन स्वस्थ मानसिकता वाले विपक्ष का, जो हमें 2005 में मिला, न कि उस विपक्ष का, जिसकी मानसिकता मात्र कब्जा करने की हो। आज देश में भी मोदीजी को विपक्षी चोर और ना जाने क्या-क्या बोल रहे हैं और देश की बर्बादी में जाने-अनजाने में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। विदेशों में देखिये वहाँ का विपक्ष जब देश की बात आती है तो पक्ष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो जाता है। आगे यही कहूंगा कि जब हर जगह से उनके झूठ को हार मिलने लगी तो उन्होंने भायनक रणनीति अपनाई।
कोर्ट द्वारा निदेशक मण्डल के अधिकार छीन लिए गए। बोर्ड को नीतिगत निर्णय नहीं लेने का आदेश कोर्ट द्वारा लाया गया। बोर्ड था हम सब सदस्य थे लेकिन बैंक के व्यापार विस्तार आदि पर कोई निर्णय नहीं ले सकते थे। इतने पर भी इनका मन नहीं भरा तो इन्होंने बड़े बड़े तथाकथित घोटालों के झूठे इल्जाम लगाने शुरू कर दिए। आप सोचिए अगर ऐसे घोटाले होते या गबन होता, तो क्या बैंक लाभ में रहता? क्या बैंक बन्द होने के कागार पर नहीं आ जाता। इनका एक ही ध्येय है कि हमारे पूर्वजों की अथक मेहनत द्वारा स्थापित इस बैंक को बन्द कैसे करवाया जाए।
प्रश्न : अंत में आप अंशधारकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर : अंशधारकों से मेरा यही आग्रह है कि वे सोचे समझें और 2020 से 2025 के लिए चुने गए निदेशकों की कार्यप्रणाली को देखते हुए एवं बैंक के हित को ध्यान में रखकर संस्थापक पैनल के समस्त प्रत्याशियों को अपना वोट देकर विजयी बनाएँ। मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूँ कि संस्थापक पैनल के सभी प्रत्याशी आपकी आशाओं पर खरे उतरेंगे। अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि बैंक को हानि पहुंचाने वालों को भगवान सद्बुद्धि दें।
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