कलयुग में प्रभु-नाम स्मरण ही आधार है
ब्रह्माजी के 17 मानस पुत्रों में से एक नारद मुनि थे, जिनके ज्ञान और बुद्धि के कारण सभी देवता, असुर और ऋषि उनका सम्मान करते थे। नारद मुनि ने ऋषियों के साथ मिलकर चर्चा करके नारद पुराण की रचना की थी। इस पुराण में कलियुग के बारे में बहुत कुछ बताया गया है। कलियुग कैसा होगा, कलियुग के लोग कैसे होंगे, कलियुग में क्या होगा और किन कार्यों को करने से मनुष्य कलियुग में भी सुखी रह सकता है।
पुराण में जीवन-मृत्यु, गृहस्थ जीवन और लोक-परलोक का भी वर्णन है। नारद पुराण के अनुसार अगर व्यक्ति कुछ कार्य कर ले, तो वह कलियुग में भी सुखी रह सकता है और सभी बाधाएं भी दूर रहती हैं।नारद पुराण के अनुसार, जब घोर कलियुग आएगा, तब ईमानदार और श्रेष्ठ मनुष्य में भी दोष निकाला जाएगा। अधर्म ही लोगों का भाई-बंधु बन जाएगा। मनुष्य दया, धर्म आदि से शून्य हो जाएंगे।
संकट आने पर न कोई गुरु होगा, न कोई शिष्य होगा, न पुत्र, न पिता, न पत्नी और न पति होगा। कलियुग में गुरुजनों का सम्मान नहीं होगा। धन कमाने हेतु व्यक्ति किसी भी राह पर जाने को तैयार होगा। नारद पुराण के अनुसार, कलियुग में बीज और फल नष्ट होने लगेंगे, जिससे किसान वर्ग दुःखी रह सकता है। लोग अपना पेट भरने पर अधिक ध्यान देंगे। कलियुग में मांसाहार भी अधिक बढ़ जाएगा।
कलियुग में विष्णु भक्ति और दान से दूर होंगी जीवन की बाधाएं
कहा जाता है कि कलियुग में लोगों की आयु भी घट जाएगी। नारद पुराण में बताया गया है कि कलियुग आने पर जो लोग भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहेंगे, उन्हें कलियुग की किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। सतयुग में भगवान की तपस्या, त्रेता में भगवान का ध्यान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में एकमात्र दान करने को श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में जो कलियुग में दान-पुण्य के कार्य करेगा, उसे कलियुग बाधा नहीं होगी।
नारद पुराण के अनुसार, सतयुग में पुण्य-कर्म दस वर्षों में सिद्ध हो पाता हैं, त्रेतायुग में एक वर्ष में और द्वापर में एक महीने में सिद्ध होता है, तो कलियुग में एक ही रात में सफल हो जाता है। कलियुग में भगवान विष्णु की पूजा व आराधना करने का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। माना जाता है कि मनुष्य को जो फल सतयुग में ध्यान से, त्रेता में यज्ञों से, द्वापर में भगवान की पूजा करने से प्राप्त होता है, वही फल कलियुग में केवल विष्णुजी का कीर्तन करने से प्राप्त हो जाता है।
घोर कलियुग आने पर जो जातक दिन-रात विष्णु भगवान की पूजा व कीर्तन करते हैं, उन्हें बाधा का सामना नहीं करना पड़ता है। नारद पुराण के अनुसार, व्यक्ति को कलियुग में निष्काम या सकाम भाव से ‘नमो नारायणाय’ का कीर्तन करना चाहिए। मान्यता है कि घोर कलियुग आने पर भी भगवान विष्णु का ध्यान करने वाले को कभी कष्ट नहीं मिलता है।
कलियुग में शिव-विष्णु नाम जप से मिलती है सुख और शांति
नारद पुराण के अनुसार, जो मनुष्य नियमित रूप से प्रतिदिन ‘हरे, केशव, गोविंद, वासुदेव’ आदि प्रकार से भगवान का कीर्तन करते हैं, उन्हें अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है। भगवान शिव के शिव, शङ्कर, रुद्र, ईश, नीलकंठ, त्रिलोचन आदि नामों का उच्चारण करने से कलियुग में मानव जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
नारदजी, महादेव, विरूपाक्ष, गंगाधर, मृड, अव्यय इस तरह शिवजी के नामों का कीर्तन करने से मनुष्य संतुष्ट और धन्य महसूस करेगा। विष्णुजी के नामों जनार्दन, जगन्नाथ, पीताम्बरधारी, अच्युत आदि का उच्चारण करने से मनुष्य को कलियुग से कोई भय नहीं रहता है। नारद पुराण में बताया गया है कि जब घोर कलियुग आएगा, तब संसार में मनुष्यों को पुत्र, स्त्री, धन आदि सुलभ होंगे, लेकिन भगवान विष्णु की भक्ति करना दुर्लभ होगा।
जो लोग वैदिक परंपराओं और नियमों से दूर पाप-कर्म करने वाले होंगे और मानसिक शुद्धि से रहित रहेंगे, उनका उद्धार केवल भगवान का नाम लेने से ही हो जाएगा। नारद पुराण के अनुसार, व्यक्ति को अपने अधिकार या अपने सामर्थ्य के अनुसार वैदिक कर्मों का अनुष्ठान करके उन्हें भगवान विष्णुजी को समर्पित करना चाहिए। स्वयं श्रीहरि की शरण होकर रहें। विष्णुजी को समर्पित किए कर्म स्मरण मात्र से ही पूर्ण हो जाते हैं। जो मनुष्य भगवान विष्णु का स्मरण करता है और भगवान शिव जी के नामों का जप करता है, उनके कर्म निश्चय ही पूरे होते हैं।
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