सनातन धर्म प्रचारक आचार्य श्री इन्द्रश उपाध्याय महाराज
परम पूज्य आचार्य श्री इन्द्रश उपाध्याय महाराज का जन्म श्रीवृन्दावन धाम स्थित सेवा कुंज में श्रीमद्भागवत व राम-कथा वाचक परम पूज्य श्रीकृष्णचन्द्र शास्त्रा एवं श्रीमती नर्वदा देवी के यहाँ 7 अगस्त, 1996 में हुआ। पूज्यश्री ने अपने पूज्य पिताश्री से श्री वैष्णव संप्रदाय की दीक्षा ली। इनका गुरु-स्थान जगन्नाथपुरी स्थित श्री जीयर स्वामी मठ है। इन्होंने दीक्षा के पश्चात श्रीद्वारिकाधीश में व्यास आसान पर विराजमान होकर श्रीमद्भागवत जी के प्रति अपनी सेवा देनी प्रारंभ की। इन्हें भारत के विख्यात संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
देश-विदेश में लगातार श्रीमद्भागवत जी की सेवा करते हुए सनातन धर्म और भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। इनके प्रवचनों से प्रेरित होकर युवा वैष्णव धर्म से जुड़ रहे हैं और भक्ति के पथ पर बढ़ रहे हैं। आप बचपन में स्कूली पढ़ाई के साथ अपने नाना पंडित श्रीकृष्ण लाल शास्त्रा से भक्त-चरित्र एवं भागवत-चरित्र का श्रवण किया करते थे। उसी के कारण कथा-वाचन के साथ-साथ भगवान के प्रति भक्ति-भाव एवं उनके अर्चावतार में आपकी प्रगाढ़ निष्ठा हो दई।
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आप आज श्रीनाथ की सेवा करते हैं। उनके अनेक मंगल उत्सव मनाते हैं। विशेष रूप से प्रति वर्ष 11 से 17 जनवरी तक भारत के विभिन्न धामों में श्रीगिरधर लाल का जन्मोत्सव मनाते हैं, जिसमें भारत के संत-महात्मा उपस्थित होते हैं। आप गौ सेवा, संत सेवा, ब्राह्मण सेवा निरंतर करते हैं। आपने भागवत सेवा से ही वृंदावन में श्री भक्तिपथ गौकुलम का निर्माण करवाया है, जहाँ अनेक गौवंश की सेवा निरंतर की जा रही है। बच्चों की शिक्षा के लिए श्री रामानुज वेद-वेदाङ्ग विद्यालय की स्थापना में रत हैं, जिसमें बच्चों को सभी प्रकार की शिक्षा देने का प्रयास किया जाएगा।
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