एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने 6 घंटे में जोड़ा कटा हाथ
जयपुर, डॉक्टर साहब, कुछ कीजिए। मेरे बेटे का हाथ कट गया है। अलवर से जयपुर पहुंचे एक मां की ये चीख, शायद किसी भी डॉक्टर का दिल पिघला सकती थी। लेकिन एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर सिर्फ भावुक नहीं हुए, उन्होंने वो कर दिखाया जिसे चमत्कार कहने में भी कोई हिचक नहीं। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में कुछ दिन पहले एक ऐसी सर्जरी हुई, जिसने ना सिर्फ एक मासूम का भविष्य बचा लिया, बल्कि मेडिकल साइंस में भरोसा और गहरा कर दिया।
अलवर के रहने वाले छह साल के जसप्रीत सिंह का हाथ घास काटने की मशीन में आकर पूरी तरह कट गया था। हथेली अलग होकर जमीन पर गिर चुकी थी। चीख-पुकार मची, खेत में मौजूद हर इंसान की आंखें फटी की फटी रह गईं। परिजनों ने बिना वक्त गंवाए जसप्रीत को पास के एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया। वहां से उसे तत्काल जयपुर रेफर कर दिया गया। रात के करीब 9 बजे जब बच्चे को ट्रॉमा सेंटर लाया गया, तब वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने हालात की गंभीरता को पहचानते हुए देर नहीं की।
6 घंटे की सर्जरी से बच्चे का हाथ सफलतापूर्वक जुड़ा
डॉ. प्रदीप गुप्ता की अगुवाई में डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने रातभर ऑपरेशन थिएटर में मोर्चा संभाला। ये कोई आम सर्जरी नहीं थी। यह वक्त और संयम की दौड़ थी। एक-एक नस को जोड़ना, मांसपेशियों को दुरुस्त करना, खून का बहाव सामान्य करना ये सब कुछ उस नन्हे हाथ को फिर से जिंदा करने के लिए ज़रूरी था। और आखिरकार छह घंटे की मेहनत के बाद वो असंभव संभव हो गया। जसप्रीत की कटी हथेली को फिर से जोड़ दिया गया।
डॉ. आकांक्षा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद 12 दिन तक लगातार निगरानी में रखने के बाद यह देखा गया कि अंग में खून का प्रवाह सामान्य है, रंग भी ठीक है और कोई संक्रमण नहीं फैला। यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है। इस ऑपरेशन में एक और बड़ी भूमिका उस पहले अस्पताल की भी रही, जिसने कटी हथेली को बर्फ वाले कंटेनर में सही तरीके से संरक्षित किया।
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अगर अंग सही तापमान में न रखा जाता, तो शायद सर्जरी संभव न होती। डॉक्टरों के मुताबिक, कटे हुए अंग को अधिकतम छह घंटे तक ही जीवित रखा जा सकता है। फिलहाल जसप्रीत का हाथ जुड़ गया है, लेकिन अब उसे फिजियोथेरेपी और मांसपेशियों को दोबारा एक्टिव करने की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो करीब 4 से 6 महीने तक चलेगी।
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