ग्रहण काल में भी कुछ मंदिर होते हैं खुले

सनातन धर्म में पूजा-पाठ के समय कुछ धार्मिक नियमों का अवश्य पालन किया जाता है, जिनमें एक हैं- ग्रहण काल में मंत्र जाप तथा ध्यान किया जाता है, लेकिन देवी-देवताओं के विग्रहों की पूजा नहीं की जाती है और मंदिरों के पट बंद किए जाते हैं। किंतु इसके विपरीत कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जहां ग्रहण का कोई नियम लागू नहीं होता है और इस दौरान भी इनके कपाट खुले होते हैं और भक्त दर्शन कर सकते हैं। इस मंदिरों के साथ कई मान्यताएं जुड़ी हैं, तो जानें उन मंदिरों के बारे में।

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां के पट कभी बंद नहीं होते हैं। कहते हैं कि महाकाल स्वरूप भगवान शिव स्वयंभू हैं और ग्रहण का उन पर कोई असर नहीं पड़ता है। इस कारण चाहे ग्रहण हो या कुछ और इस मंदिर का मुख्य दरवाजा हमेशा खुला रहता है और भक्त निरंतर पूजा करते रहते हैं।

दिल्ली का कालकाजी मंदिर

दिल्ली का कालकाजी मंदिर भी इस मामले में काफी मशहूर है। मान्यता है कि कालका देवी कालपा की स्वामिनी हैं और सारे ग्रह-नक्षत्र उनके नियंत्रण में रहते हैं। यही वजह है कि ग्रहण का इस मंदिर पर कोई असर नहीं पड़ता है, जिस कारण इसके पट खुले रखे जाते हैं और भक्त यहां दर्शन-पूजन करने आते हैं।

उत्तराखंड का कल्पेश्वर मंदिर

उत्तराखंड का कल्पेश्वर मंदिर भी ग्रहण के दौरान खुला रहता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने माँ गंगा की धारा को नियंत्रित किया था। इस कारण इस मंदिर के द्वार भी ग्रहण के दौरान बंद नहीं किए जाते हैं और श्रद्धालु यहां आकर मन और तन दोनों की शांति महसूस करते हैं।

थिरुवरप्पु का श्रीकृष्ण मंदिर

केरल के कोट्टायम में स्थित थिरुवरप्पु का श्रीकृष्ण मंदिर भी काफी अनोखा है। यहां भगवान कृष्ण को दिन में दस बार भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि यहाँ भगवान को भूख बहुत लगती है। इसी कारण ग्रहण के दौरान भी यहाँ भगवान को भोग लगाया जाता है। अत भक्तों के लिए इस मंदिर के पट खुले होते हैं।

गया का विष्णुपद मंदिर

गया का विष्णुपद मंदिर भी इस मामले में खास है। यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहाँ ग्रहण के दौरान भी श्रद्धालु अपने पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान कर सकते हैं। अत इसी कारण इस मंदिर के पट भी सदा ही खुले रखे जाते हैं।

बीकानेर का लक्ष्मीनाथ मंदिर

राजस्थान के बीकानेर में लक्ष्मीनाथ मंदिर की भी एक अनोखी कहानी है। कहा जाता है कि एक बार ग्रहण के दौरान मंदिर के पट बंद किए गए थे, जिससे भगवान को भोग नहीं दिया गया था। तब मंदिर के पास स्थित दुकान के हलवाई को सपने में आकर भगवान ने अपने भूखे होने की बात बताई। बस तभी से यह परंपरा चली आ रही है और इस मंदिर के कपाट ग्रहण काल में भी बंद नहीं किए जाते हैं।

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