राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर टीआईएफआर में विशेष व्याख्यान

हैदराबाद, गोपनपल्ली स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), हैदराबाद परिसर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। अवसर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ पत्रकार और लेखक डॉ. दिनेश सी. शर्मा ने हैदराबाद में वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना और उसमें परमाणु ऊर्जा विभाग की भूमिका पर विशेष व्याख्यान दिया।

आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विज्ञान की प्रगति और विकास में हैदराबाद के योगदान पर चर्चा करते हुये डॉ. शर्मा ने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग के हैदराबाद में कई वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थान हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, परमाणु खनिज प्रभाग, परमाणु ईंधन परिसर, टीआईएफआर बैलून परीक्षण प्रमुख हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर व्याख्यान
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर व्याख्यान

हैदराबाद में संस्थानों का विकास और राष्ट्र निर्माण में योगदान

इस सूची में हाल ही में शामिल होने वाला संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च का हैदराबाद परिसर है। इन सभी संस्थानों ने हाल के कुछ दशकों में हैदराबाद को प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की बड़ी कवायद का एक महत्वपूर्ण पहलू 1947 के बाद भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान का संगठन है।

दो प्रमुख संस्थान परमाणु ऊर्जा विभाग और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के नेतृत्व में देश भर में कई संस्थानों का निर्माण किया गया। गरीबी, अशिक्षा और भूखमरी के दौर में विज्ञान और वैज्ञानिक सोच के प्रधानमंत्री नेहरू ने हिमाकत की और शोध को बढ़ावा दिया।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कई कारकों ने हैदराबाद में नए संस्थानों और प्रयोगशालाओं की स्थापना को प्रभावित किया। 1950 के दशक में हैदराबाद के आजाद भारत का हिस्सा बनने के बाद राष्ट्र निर्माण के लिये केंद्र ने योजना रखी।

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हैदराबाद में अनुसंधान संस्थानों का विकास और प्रभाव

होमी भाभा के नेतृत्व में परमाणु ऊर्जा संस्थान इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा था। 1960 और 1970 के दशक में हैदराबाद में परमाणु ऊर्जा विभाग और अन्य वैज्ञानिक एजेंसियों द्वारा बनाए गए संस्थानों ने हैदराबाद के भविष्य के लिए एक ईको सिस्टम की नींव रखी।

डॉ. शर्मा ने कहा कि जब सितंबर 1948 में हैदराबाद राज्य भारत का हिस्सा बन गया, तो हैदराबाद शहर में केवल तीन उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थान थे उस्मानिया विश्वविद्यालय, निज़ामिया वेधशाला भी इसका एक हिस्सा थी, केंद्रीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशालाएँ जो सीएलएसआईआर, जो बाद में आरआर लैब बन गई और हैदराबाद विज्ञान सोसाइटी।

1960 के दशक में परमाणु ऊर्जा विभाग और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने नए संस्थानों की स्थापना के लिए हैदराबाद को चुना। डॉ. शर्मा ने कहा कि हैदराबाद में इतने सारे अनुसंधान एवं विकास संस्थानों की मौजूदगी ने निजी क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला, जिससे सहायक इकाइयों, छोटे और मध्यम उद्यमों, उद्यमी फर्मों को प्रोत्साहन के साथ जनशक्ति विकास को बढ़ावा मिला।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर तकनीकी आत्मनिर्भरता पर चर्चा

उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने तकनीकी कौशल और रोजगार में भी योगदान दिया। साथ ही औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद की।

उन्होंने कहा कि बाद के दशकों में इटरप्रेन्योर फर्मों के उभरने में मदद करने वाली प्रक्रियाओं में राज्य और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की सहायक भूमिका को कम नहीं आंका जाना चाहिए। इकाफाई बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर प्रदीप कृष्णात्रे ने विषय की प्रस्तुति दी।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च हैदराबाद परिसर के निदेशक डॉ. एम. कृष्णमूर्ति ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। अवसर पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च हैदराबाद के कई अनुसंधानकर्ता छात्र उपस्थित थे।

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