अमेरिका के साथ वार्ता जटिल : अराघची

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दुबई, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने तीन परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमले से गंभीर क्षति की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि इसकी वजह से उनके देश के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ नई वार्ता की संभावना जटिल हो गई है। अमेरिका 2015 के उस परमाणु समझौते में शामिल पक्षों में से एक था, जिसमें ईरान ने प्रतिबंधों में राहत और अन्य लाभों के बदले अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का दायरा सीमित रखने पर सहमति जताई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान एकतरफा रूप से अमेरिका के इस समझौते से बाहर निकल जाने के बाद यह समझौता विफल हो गया था। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह ईरान के साथ नए सिरे से वार्ता में रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अगले सप्ताह मिलेंगे। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर बृहस्पतिवार को प्रसारित एक साक्षात्कार में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संभावना को खुला छोड़ दिया कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर फिर से वार्ता में शामिल होगा, हालाँकि उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि यह वार्ता जल्दी नहीं होगी।

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ईरान-अमेरिका वार्ता और जासूसी पर सख्त रुख

उन्होंने कहा कि वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कोई सहमति नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है, कोई वादा नहीं किया गया है, और हमने वार्ता को फिर से शुरू करने के बारे में भी बात नहीं की है। अराघची ने कहा कि सैन्य हस्तक्षेप करने के अमेरिकी निर्णय ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता को और अधिक जटिल और कठिन बना दिया है। कई इमामों ने जुमे (शुक्रवार) की नमाज में ईरान के सर्वेच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पिछले दिन के इस संदेश पर जोर दिया कि युद्ध ईरान की जीत है।

ईरान के उप-प्रधान न्यायाधीश मौलवी हमजेह खलीली ने तेहरान में एक प्रार्थना सभा के दौरान संकल्प लिया कि अदालतें इजराइल के लिए जासूसी करने के आरोपियों पर एक विशेष तरीके से मुकदमा चलाएँगी। इजराइल के साथ युद्ध के दौरान, ईरान ने जासूसी के आरोप में पहले से हिरासत में लिए गए कई लोगों को फाँसी पर लटका दिया, जिससे कार्यकर्ताओं में यह डर पैदा हो गया कि युद्ध समाप्त होने के बाद वह (ईरान) बड़ी संख्या में फाँसी को अंजाम देगा।

अधिकारियों ने इजराइल को सहयोग करने के आरोप में विभिन्न शहरों में दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया है। इजराइल ने 13 जून को ईरान पर हमला किया था और उसके परमाणु स्थलों, रक्षा प्रणालियों, उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को लगातार हमलों में निशाना बनाया।(एपी)

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