टैरिफ वॉर बनाम किसान हित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अगस्त, 2025 को अहमदाबाद के खोडलधाम मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश के किसानों, छोटे उद्यमियों और पशुपालकों को आश्वस्त किया कि भारत सरकार उनके हितों को सर्वोपरि रखेगी। यह भाषण न केवल उनकी नीतियों का दृढ़ बयान था, बल्कि वैश्विक व्यापार तनावों, विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के संदर्भ में भारत की कूटनीतिक स्थिति को स्पष्ट करने वाला एक सूक्ष्म संदेश भी था।

प्रधानमंत्री का यह कथन कि किसानों, छोटे उद्यमियों और पशुपालकों का हित मेरे लिए सर्वोपरि है ग्रामीण भारत को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अहमदाबाद में 5,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन यह संकेत देता है कि सरकार बुनियादी ढाँचे और ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी पर ध्यान दे रही है। इनमें स्लम पुनर्वास, सड़क चौड़ीकरण, जल-सीवरेज प्रबंधन और विद्युत वितरण शामिल हैं। ये कदम किसानों को बाजारों तक बेहतर पहुँच प्रदान करेंगे, जिससे उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।

ट्रंप टैरिफ वॉर पर मोदी का कड़ा संदेश

दरअसल, प्रधानमंत्री का यह भाषण वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों – विशेष रूप से डोनल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर – के संदर्भ में बहुत अहम है; मानीखेज भी! ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर दंडित (!) करने के लिए बहुत ऊँचे टैरिफ की घोषणा कर रखी है, जिसे आज 27 अगस्त से लागू होना है। यह ऑपरेशन सिंदूर के संघर्ष विराम का श्रेय न मिलने से चिढ़े हुए अमेरिकी राष्ट्रपति की दबाव की कूटनीति है। इसका भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर भी विपरीत असर स्वाभाविक है।

इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी का बयान हमारे लिए अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम उनके हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे एक कड़ा कूटनीतिक संदेश है। यह न केवल किसानों को आश्वस्त करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है। भारत ने ट्रंप के टैरिफ को अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण करार दिया है। साथ ही यह संकेत भी कि हम अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी उपाय करेंगे।

यह भी पढ़ें… ट्रंप की खीझ बनाम रूस-भारत-चीन त्रिभुज

टैरिफ वॉर में भारत की रणनीति और किसान हित

प्रधानमंत्री मोदी के इस सीधे संदेश से राष्ट्रपति ट्रंप शायद कुछ और चिढ़ जाएँ कि भारत न तो दबाव में झुकेगा और न ही अपने रणनीतिक हितों से समझौता करेगा! लेकिन इस संदेश का सीधा संबंध वोकल फॉर लोकल और मेड इन इंडिया जैसे अभियानों से है। ये ही वे अभियान हैं न जो स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की दूसरे देशों के ऊपर निर्भरता को कम करने की रणनीति को दर्शाते हैं!

भविष्य के कदमों की बात करें तो, भारत सरकार कृषि क्षेत्र में सुधारों को गति दे सकती है। डिजिटल कृषि, जैविक खेती और फसल बीमा योजनाओं को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा, बिम्सटेक और सार्क जैसे क्षेत्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाकर भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार खोजे जा सकते हैं। टैरिफ वॉर के जवाब में, भारत को विश्व व्यापार संगठन में अपनी स्थिति मजबूत करनी चाहिए। द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर ध्यान देना चाहिए। रूस के साथ ऊर्जा सहयोग को जारी रखने का भारत का रुख भी ट्रंप के दबाव के खिलाफ एक रणनीतिक कदम है।

कहना ही होगा कि प्रधानमंत्री का अहमदाबाद भाषण किसानों को आश्वस्त करने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भारत की दृढ़ता का प्रतीक है। यह ट्रंप के टैरिफ वॉर के खिलाफ भारत की स्वायत्तता और रणनीतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है। सरकार को अब इन वादों को ठोस नीतियों में बदलने और किसानों के हितों को सुरक्षित रखने की ज़रूरत है। उम्मीद की जानी चाहिए कि टैरिफ वॉर की आग में तपकर भारत की अर्थव्यवस्था सचमुच कुंदन सी निखर आएगी!

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button