एयरोस्पेस जरूरतों के लिए तैयार हो रहा है तेलंगाना : श्रीधर बाबू
हैदराबाद, सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने शुक्रवार को कहा कि तेलंगाना अनुसंधान और विकास उन्नत विनिर्माण, प्रमाणन व अनुपालन पर केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर देश के भविष्य की एयरोस्पेस आवश्यकताओं के लिए रणनीतिक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंत्री ने गच्चीबावली स्थित इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया में द एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के हैदराबाद चैप्टर द्वारा आयोजित एयरोस्पेस में बदलता परिदृश्य : अनुसंधान एवं विकास, विनिर्माण और प्रमाणन विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विनिर्माण और आरएंडडी क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने तथा अकादमिक व उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करना था।
श्रीधर बाबू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसंधान एवं विकास, विनिर्माण व प्रमाणन जैसे तीन स्तंभों को सफलतापूर्वक एकीकृत करने वाले ही एयरोस्पेस में वैश्विक नेता के रूप में उभरेंगे। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार वैश्विक एयरोस्पेस क्षेत्र के सामने आने वाले तीव्र परिवर्तनों और चुनौतियों का जवाब देने में सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है।
श्रीधर बाबू ने कहा कि एयरोस्पेस अब केवल विमानों और मशीनों के निर्माण तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह किसी राष्ट्र की रणनीतिक क्षमता, तकनीकी शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतिबिंब बन गया है। जहाँ एक समय इस क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और यूरोप का वर्चस्व था, वहीं अब भारत वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार
यूनेस्को के अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक और इंजीनियर भंडारों में से एक है। हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार प्रयोगशालाओं में किए गए शोध का तीस प्रतिशत से कम हिस्सा व्यावसायिक उत्पादन में परिवर्तित हो पाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस अंतर को पाटने और अनुसंधान को उत्पादों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने कहा कि कहा कि बोइंग और एयरबस ने अनुमान लगाया है कि अगले दो दशकों में दुनिया को लगभग बयालीस हजार नए विमानों की आवश्यकता होगी। तेलंगाना विशेष रूप से हैदराबाद अपने सटीक इंजीनियरिंग आधार, रक्षा विनिर्माण नेटवर्क, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर इस अवसर का लाभ उठाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से हैदराबाद में विश्व स्तरीय एयरोस्पेस प्रमाणन प्रणाली के विकास में सहयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि इसमें सभी आवश्यक लाभ मौजूद हैं।
यह भी पढ़ें… वैज्ञानिक तरीकों से होगी कालेश्वरम बैराजों की मरम्मत : उत्तम कुमार रेड्डी
श्रीधर बाबू ने कहा कि हैदराबाद में 1,500 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम पहले से वैश्विक एयरोस्पेस कंपनियों को पुर्जों की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने कहा ड्रोन, पुन: प्रयोज्य रॉकेट, एआई-सक्षम एवियोनिक्स, थ्रीडी प्रिंटिंग और उन्नत सामग्री जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ एयरोस्पेस के भविष्य को आकार देंगी। तेलंगाना इन संभावनाओं के अनुसार स्वयं को तैयार कर रहा है।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।






