भू-अधिग्रहण पीड़ितों को मिले आरआर पैकेज : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के पीड़ितों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 की अनुसूची 2 और 3 के अनुसार पुनर्वास और पुनर्निर्माण योजना (आरआर पैकेज) प्रदान की जानी चाहिए। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1956 के तहत भूमि अधिग्रहण किया गया है, तब भी यह अधिनियम लागू रहेगा।
करीमनगर-वरंगल राष्ट्रीय राजमार्ग 563 के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में विस्थापितों ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी (आरडीओ) को आवेदन दिया है। आरडीओ को इन आवेदनों पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। हनमकोंडा ज़िले के इलाकुर्ती मंडल के सुरारम ग्राम निवासी एस.के. साबिर सहित 12 लोगों ने वर्ष 2023 में याचिकाएँ दायर कर आरोप लगाया था कि करीमनगर, वरंगल राष्ट्रीय राजमार्ग 563 की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में आरआर पैकेज लागू नहीं किया गया। एकल न्यायाधीश ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
यह माना गया कि याचिकाकर्ता धारा जी(5) के तहत अधिकारियों से निवारण माँग सकते हैं। इस फैसले को चुनौती देते हुए सभी याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपील याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने सुनवाई की।
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अधिवक्ता रवि कुमार ने तर्क दिया कि यद्यपि भूमि का अधिग्रहण 1956 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत किया गया था, फिर भी पीड़ितों को नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत पुनर्वास योजना लागू करने के आदेश दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इसके संबंध में वर्ष 2015 के दौरान ही दिशा-निर्देश जारी किए थे। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल पी. नरसिम्हा शर्मा ने इस तर्क का समर्थन किया। इसके बाद उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया।
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