तेलंगाना हाईकोर्ट : मेदक ज़िलाधीश को सुनाई गई 6 माह कारावास की सजा

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मेदक ज़िलाधीश राहुल राज को एक भूमि विवाद के मामले में अदालत के आदेश का पालन न करने के लिए 6 माह साधारण कारावास की सजा सुनाते हुए दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह जुर्माना आदेश जारी होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर अदा करना होगा। इस सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए अदालत ने फैसले के क्रियान्वयन पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने ज़िलाधीश को मेदक ज़िले के चेगुंटा के बोनाला सर्वे नं. 284/ए/2 स्थित 2.22 एकड़ भू विवाद में दिए गए आदेशों का पालन न करने के लिए कारावास की सजा सुनाई।

नागावेल्ली लक्ष्मी ने अप्रैल-2024 के दौरान याचिका दायर कर दावा किया था कि वह मेदक ज़िले के चेगुंटा मंडल के बोनाला सर्वे नं. 284/ए/2 स्थित 2.22 एकड़ भूमि की उत्तराधिकारी है और उसने भूमि का विवरण अपने नाम पर पंजीकृत करवाने के आदेश माँगे थे। न्यायाधीश ने इस संबंध में ज़िलाधीश द्वारा जारी कार्रवाई को रद्द कर दिया। लक्ष्मी के साथ प्रतिवादी नारायण और मल्लय्या को भी नोटिस जारी किए थे। इसके साथ ही नए सिरे से जाँच के भी आदेश दिए गए।

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बिक्री विलेख की जांच के दिए गए निर्देश

बिक्री विलेक (सेलडीड) और सादाबायनामा के नियमितीकरण संबंधी उपायों की जाँच करने और कानून के अनुसार उचित आदेश जारी करने का भी आदेश दिया गया। इसके लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया। आदेश का पालन न होने पर लक्ष्मी द्वारा दायर अवमानना की याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस के. लक्ष्मण ने सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आदेशों का पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि ज़िलाधीश ने जान-बूझकर अदालत द्वारा पहले जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं किया। इसीलिए अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए। न्यायाधीश ने इससे संबंधित रिकॉर्ड की जाँच की और पाया कि सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए रिकॉर्ड में कोई तारीख नहीं थी। यह भी पाया गया कि यह भी पुष्टि नहीं हुई थी कि याचिकाकर्ता को नोटिस प्राप्त हुए थे।

सरकार की ओर से सहायक अधिवक्ता ने कहा कि नोटिस याचिकाकर्ता को व्हॉट्सऐप के माध्यम से भेजे गए थे। इस पर न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि इस मामले का उल्लेख प्रतियाचिका में क्यों नहीं किया गया। उन्होंने 51 वर्षीय महिला की दो एकड़ जमीन के लिए बार-बार अदालत के चक्कर लगाने के लिए कड़ी आलोचना की। न्यायाधीश ने अपना फैसला देते हुए ज़िलाधीश को कारावास की सजा सुनाई।

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