हैदराबाद की संकरी गलियों में दौड़ेंगी टीजीएसआरटीसी की मिनी इलेक्ट्रिक बसें

हैदराबाद, तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) नगर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पुरानी बस्तियों की संकरी सड़कों को ध्यान में रखते हुए 1 हजार मिनी इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बना रहा है। इन बसों का मुख्य उद्देश्य मेट्रो रेल सेवाओं के लिए बेहतर फर्स्ट माइल और लास्ट माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
निगम के सूत्रों ने बताया कि नई मिनी इलेक्ट्रिक बसें आवासीय कॉलोनियों को मेट्रो स्टेशनों से जोड़ेंगी, जिससे यात्रियों को आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। खासतौर पर पुराने शहर और तंग गलियों वाले इलाकों में बड़ी बसों के संचालन में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए यह योजना तैयार की गई है। राज्य सरकार अब केवल किराये की बसों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे तौर पर
लगभग 2 हजार इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में हैदराबाद में आरटीसी के पास 3 हजार से भी कम बसें हैं, जबकि तेजी से बढ़ती आबादी और यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए शहर को कम से कम 6 हजार बसों की आवश्यकता बताई जा रही है। इसी कमी को दूर करने के लिए निगम ने आने वाले वर्षों में बसों की संख्या बढ़ाकर करीब 5 हजार तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
केंद्र सरकार की योजना से मिलेगा सहयोग
केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत हैदराबाद को पहले ही 2300 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की जा चुकी हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाकी जरूरत को आरटीसी सीधे खरीद के जरिए पूरा करेगा। सूत्रों के अनुसार, मेट्रो रेल विस्तार
परियोजना हेतु लिए जा रहे ऋण का कुछ हिस्सा आरटीसी की इलेक्ट्रिक बसों की खरीद में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ते कदमों से आरटीसी कर्मचारियों में चिंता भी बढ़ गई है। वर्तमान ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत निजी कंपनियां ड्राइवर और मेंटेनेंस स्टाफ उपलब्ध कराती हैं, जबकि आरटीसी केवल कंडक्टर तैनात करता है।
कर्मचारी यूनियनें नगर के डिपो से आरटीसी ड्राइवरों और मैकेनिकों को बाहरी डिपो में भेजे जाने का विरोध कर रही हैं। दूसरी ओर सरकार कर्मचारियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि भविष्य में बसों की सीधी खरीद से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को फिर से नगर में काम करने का अवसर मिलेगा।
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