युवाओं के लिए वित्तीय साक्षरता के महत्व पर संगोष्ठी में चर्चा
हैदराबाद, अग्रवाल शिक्षा समिति द्वारा राधे कृष्णा वूमेंस कॉलेज और सिग्नोडिया कॉलेज के युवा विद्यार्थियों के लिए समिति के सेडमल हॉल में पैनल चर्चा आयोजित की गई।






पैनल चर्चा का मुख्य विषय युवाओं के लिए वित्तीय साक्षरता का महत्व था। इसमें विद्यार्थी बजट बनाना, बचत करना, समझदारी से निवेश करना और कर्ज के जाल से बचना इत्यादि विषयों पर चर्चा हुई। इससे सुनने और समझने के पश्चात विद्यार्थी वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने और भविष्य के लिए धन प्रबंधन में सक्षम बनेंगे, ताकि उनकी आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सके। यह संगोष्ठी युवाओं को वित्तीय साक्षरता प्राप्त करने और भविष्य के लिए धन प्रबंधन में सक्षम बनाती है जिससे आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।
अवसर पर अध्यक्ष प्रमोद कुमार केड़िया, चेयरमैन ट्रस्ट बोर्ड डॉ. श्याम सुन्दर अग्रवाल, राधेकृष्णा वूमेंस कॉलेज करेस्पॉन्डेंट डॉ. महेश कुमार केड़िया, एस. डी. सिग्नोडिया कॉलेज करेस्पॉन्डेंट शिव शंकर अग्रवाल, अग्रवाल बॉयज जूनियर कॉलेज करेस्पांडेंट बद्री विशाल बंसल और सीए रवि लाडिया मंचासीन थे। करेस्पांडेंट डॉ. महेश कुमार केड़िया ने कहा कि वित्तीय साक्षरता युवाओं के भविष्य के लिए बहुत लाभदायक है।
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शिक्षा व भविष्य निर्माण पर दिया गया संदेश
अग्रवाल शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार केड़िया का परिचय राधे कृष्णा वूमेंस कॉलेज की व्याख्याता कामाक्षी बाहेती ने दिया। उन्होंने अपनी चर्चा में कहा कि आज का यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है जो युवाओं के लिए आवश्यक है। आज के विद्यार्थी कल का भविष्य हैं। अगर आप अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर हैं तो आप अपने जीवन में बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं। ट्रस्ट बोर्ड चेयरमैन डॉ. श्याम सुंदर का परिचय एस.डी. सिग्नोडिया कॉलेज की व्याख्याता अश्विनी सनपुरकर ने दिया।
डॉ. श्याम सुन्दर ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, जीवन यापन के लिए वित्तीय साक्षरता बहुत जरूरी हो जाती है। पैसा भगवान तो नहीं है, पर भगवान से कम भी नहीं है। आज के कार्यक्रम के सूत्रधार एस. डी. सिग्नोडिया कॉलेज के करेस्पांडेंट शिव शंकर अग्रवाल रहे। अग्रवाल बॉयज जूनियर कॉलेज के करेस्पॉन्डेंट बद्री विशाल बंसल का परिचय व्याख्याता समीना बेगम, राधे कृष्णा वूमेंस कॉलेज द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता के मायने सभी के लिए अलग हैं, पर सभी के लिए जरूरी है कि आमदनी के हिसाब से खर्च किया जाए।
दुनिया को साथ में रखना है, तो पैसा बहुत जरूरी है। अवसर पर समिति की अकादमी निर्देशिका डॉक्टर सरोज जैन, आराधना मोदानी समेत सभी संस्थाओं के प्राचार्यगण, शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अपने-अपने समय के शुरुआती वर्षों के संघर्ष का उदाहरण देकर समझाया कि परिस्थितियाँ सबसे अच्छी शिक्षक होती हैं। इस विषय पर अपने वक्तव्य में सभी ने कहा कि तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए- पहला पैसा कैसे बचाएं, दूसरा उसे कहां खर्च करें और तीसरा धन का महत्व। अतिथियों को पौधा देकर सम्मानित किया गया। कॉलेज के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. बद्रीविशाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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