भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान ने किया किसान सम्मान दिवस का आयोजन
हैदराबाद, भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं), हैदराबाद द्वारा किसान कल्याण, सतत कृषि तथा राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के अनुरूप, स्वच्छता पखवाड़ा के भाग के रूप में किसान सम्मान दिवस-2025 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की देशव्यापी पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की जयंती पर किसान समुदाय को सम्मानित करना एवं ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करने हेतु किए गए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुधारों के बारे में जागरूकता पैदा करना था।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तथा हितधारकों को विकसित भारत रोज़गार व आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 (जी राम जी बिल, 2025) के बारे में जागरूक करना था। यह बिल रोज़गार के अवसर बढ़ाकर, आय में स्थिरता तथा ग्रामीण विकास के प्रयासों को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालीन राष्ट्रीय दूरदृष्टि के साथ जोड़कर ग्रामीण रोज़ी-रोटी की सुरक्षा को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य बुआई व कटाई के महत्वपूर्ण मौसम के दौरान खेती में काम करने वालों की उपस्थिति को संतुलित करते हुए ज़्यादा पारिश्रमिक वाला रोज़गार देना है, जिससे किसानों व ग्रामीण श्रमिकों दोनों को सहायता मिलेगी।
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श्री अन्न से खाद्य सुरक्षा और सतत खेती पर निदेशक का जोर
डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं ने राष्ट्र निर्माण तथा खाद्य सुरक्षा में किसानों की अहम भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेषकर शुष्क भूमि एवं वर्षा आधारित क्षेत्रों में श्री अन्न फसलें जलवायु लचिली तथा सतत खेती हेतु आवश्यक फ़सलों के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने श्री अन्न के पौष्टिक लाभ, उनकी खेती पर कम लागत, प्रतिकूल मौसम झेलने की क्षमता एवं घरेलू पोषण के साथ राष्ट्रीय खाद्य प्रणाली की स्थिरता में उनके बढ़ते महत्व के बारे में सविस्तार बताया। उन्होंने किसानों को बेहतर श्री अन्न उत्पादन प्रौद्योगिकी, कटाई उपरांत वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीके तथा उत्पादकता, लाभ तथा रोज़ी-रोटी की सुरक्षा बढ़ाने हेतू मूल्यवर्धन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं के वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ सक्रिय रूप से परस्पर चर्चा कर मूल्य श्रृंखला में श्री अन्न को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के निरंतर प्रयासों पर बल दिया। इसमें बेहतर किस्मों का विकास और उनका प्रसार, किसानों के क्षमता निर्माण, खेती के वैज्ञानिक तरीकों का प्रक्षेत्र प्रदर्शन, और श्री अन्न प्रसंस्करण तथा मूल्यवर्धन हेतु तकनीकी सहायता शामिल है। कार्यक्रम के हिस्से के रूप में भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं में न्यूट्रीहब तथा श्री अन्न प्रसंस्करण एवं प्रशिक्षण एकक का एक ज्ञानवर्धक दौरा आयोजित किया गया, जहाँ किसानों को आधुनिक श्री अन्न प्रसंस्करण उपकरणों, मूल्यवर्धन तथा पैकेजिंग प्रौद्योगिकी एवं उद्यमिता विकास मॉडल से परिचित कराया गया। संगारेड्डी ज़िले के किसानों सहित लगभग 250 हितधारकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
डॉ. तारा सत्यवती ने भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं द्वारा किसानों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दोहराया, ताकि श्री अन्न को बढ़ावा दिया जा सके, किसान-केंद्रित नवोन्मेषों को मज़बूत किया जा सके और सबको साथ लेकर चलने वाले और सतत खेती के विकास में सहायता की जा सके।
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