जवानों के साथ मोदी की दिवाली के मायने

राजनीतिक आलोचक जहाँ मोदी के हर दिवाली पर जवानों के बीच जाने को और उनके साथ दिवाली का त्यौहार मनाने को राजनीतिक इवेंट का हिस्सा बताते हैं पर मोदी के साथ आने वाली जवानों की तस्वीरों से पता चलता है कि मोदी ने किस कदर सेना के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है। जब मोदी सैनिकों के साथ दिवाली मनाने जाते हैं तो जवानों के लिए यह केवल प्रधानमंत्री की यात्रा भर नहीं होती बल्कि उन्हें यह अहसास होता है जैसे देश के नागरिकों की ओर से उन्हें सामूहिक सम्मान दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार पणजी में भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत आइएनएस पांत पर नौसैनिकों के साथ दीपावली का त्यौहार मनाया। पीएम बनने के बाद मोदी ने हर साल सैनिकों के साथ दिवाली मनाने की जो परंपरा शुरू की, उन्होंने उसका इस बार भी निर्वाह किया। यह परंपरा अब एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप का प्रतीक बन चुकी है। यह सब अब सिर्फ दीयों की रौशनी में सैनिकों को मिठाई बांटने व खाने का दृश्य नहीं रह गया है बल्कि उस गहरी राष्ट्रीय भावना का प्रदर्शन है जिसमें सरकार और सैनिक के बीच की दूरी मिटाने की कोशिश साफ नजर आती है।

अब तक देश की राजनीति में त्यौहारों का इस्तेमाल हमेशा जन संपर्क के अवसर के रूप में होता आया है पर मोदी ने इसे नया आयाम दिया है। उन्होंने सत्ता के केंद्र दिल्ली की जगमगाहट को छोड़कर वह रास्ता चुना, जो सीमाओं की सर्द हवाओं, पहाड़ी चौकियों और रेतीले रेगिस्तान में घरों से दूर बैठे सैनिकों के पास पहुंचता है। वर्ष 2014 में पीएम बनने के बाद से ही मोदी हर साल जब किसी न किसी सीमा पर जाते हैं तो सैनिकों में भी जोश भर जाता है साथ ही सारा देश गर्वान्वित महसूस करता है।

अब तक वे जम्मू-कश्मीर, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जवानों के साथ दिवाली मना चुके हैं।
राजनीतिक आलोचक जहाँ मोदी के हर दिवाली पर जवानों के बीच जाने को और उनके साथ दिवाली का त्यौहार मनाने को राजनीतिक इवेंट का हिस्सा बताते हैं पर मोदी के साथ आने वाली जवानों की तस्वीरों से पता चलता है कि मोदी ने किस कदर सेना के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है।

सैनिकों के साथ मोदी की दिवाली: नई राष्ट्रवाद परंपरा

जब मोदी सैनिकों के साथ दिवाली मनाने जाते हैं तो जवानों के लिए यह केवल प्रधानमंत्री की यात्रा भर नहीं होती बल्कि उन्हें यह अहसास होता है जैसे देश के नागरिकों की ओर से उन्हें सामूहिक सम्मान दिया जा रहा है। वैसे देखा जाए तो मोदी जाते तो अकेले ही हैं पर वे पूरे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं और यही बात देशवासियों को गर्व का अनुभव कराती है। मोदी का सीमा पर दिवाली मनाना न केवल जनता के बीच उन्हें सरोकारी नेता के रूप में प्रस्तुत करता है बल्कि इससे वह भावनात्मक कड़ी भी मजबूत होती है जो आम देशवासियों को सेना के प्रति गर्व से भरती है।

हर दिवाली पर जब मोदी सैनिकों के साथ दीपक जलाते हैं तो मीडिया में छाई इस मौके की तस्वीरें देशभक्ति की प्रतीक बन जाती हैं। ऐसा करके मोदी यह संदेश भी दे जाते हैं कि देश की रक्षा और सीमाओं की सजगता पर सरकार का सर्वोपरि ध्यान है। मोदी के पीएम बनने से पहले सैनिकों का पा परेड या शहीदी दिवस पर ही होता था, वहीं इसके बाद त्योहारों में भी उनका उल्लेख एक ऐसा नवाचार है, जो आम लोगों को सीमा प्रहरियों के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता है।

अब त्योहारों में सैनिकों की उपस्थिति एक सामान्य परंपरा बन गई है। यह बदलाव इस बात का परिचायक है कि राष्ट्रवाद अब केवल नारों या झंडों तक सीमित नहीं रहा बल्कि वह संवेदना और सहभागिता का हिस्सा बन गया है। मोदी की जवानों के साथ हर वर्ष की दिवाली राष्ट्रवाद की नई परंपरा बनकर उभरी है। जब कोई प्रधानमंत्री जवानों के बीच बैठकर कहता है कि आप सब मेरे परिवार का हिस्सा हैं तो ये शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते बल्कि आत्मीयता का भाव भी जगाते हैं।

मोदी की दिवाली: सैनिकों के साथ अनुभव और संदेश

यही नहीं मोदी का हर दिवाली पर सैनिकों के पास जान, उनके साथ समय बिताना, त्यौहार मनाना और भी बहुत कुछ कहता है। दिवाली के अवसर पर सीमाओं पर दीया जलाना केवल अंधकार को मिटाने का प्रतीक नहीं है बल्कि यह उस भय और अनदेखेपन को दूर करने का भी संकेत है जो दशकों से सीमा की चौकियों को देश के सामाजिक मानस से अलग रख हुए था। अब दूरदराज सीमाओं पर बैठे सैनिक हमारे दीपोत्सव की जगमग में बराबर की भागीदारी करते नजर आते हैं।

यह केवल एक व्यक्ति की शैली नहीं है बल्कि आने वाले समय में यह सत्ता की संवेदनशीलता की स्थाई परंपरा बन कर उभरेगी। मोदी हमेशा ऐसा कुछ रचते हैं जिसकी सत्ता के शीर्ष स्तर से कभी अनदेखी नहीं की जा सकेगी। मोदी की हर शुरुआत चिरस्थाई बन रही है। कोई हैरानी नहीं होगी, यदि भविष्य के प्रधानमंत्रियों को भी देश इन तमाम परंपराओं को निभाते देखे।

आईएनएस पांत पर नौसेना के जवानों के साथ दिवाली मनाने के अपने अनुभव साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, लोग अपने परिवार के साथ दिवाली मनाना पसंद करते हैं और मैं भी यही करता हूं। मैं भी सीमा पर अपने परिवार, अपने सैनिक भाइयों के साथ दिवाली मनाता हूं। यही वे वीर सपूत हैं जो हमारे देश को सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें भारतीय सशस्र बलों के बीच दिवाली मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, आज एक तरफ मेरे सामने अनंत क्षितिज और आकाश हैं और दूसरी ओर विशाल आईएनएस पांत, जो शक्ति का प्रतीक है।

आईएनएस पांत: आत्मनिर्भर भारत और सैनिकों का गौरव

सूर्य की किरणों के महासागर पर प्रतिबिंब उस दीपक की तरह है जिसे हमारे बहादुर जवान जलाते हैं। प्रधानमंत्री ने जवानों की ऊर्जा और उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा, आईएनएस पांत पर रात बिताने के अनुभव को शब्दों में व्यक्त करना बेहद मुश्किल है। जब मैंने वीर सैनिकों को देशभक्ति गीत गाते देखा और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में इनकी भावनाएं सुनीं, तो शब्द कभी भी उस अनुभव को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर सकते जो एक जवान को युद्धभूमि पर महसूस होता है।

इसके अलावा इस अवसर पर पीएम मोदी ने आईएनएस पांत के महत्व को भी उजागर किया और कहा कि इसका नाम देश के दुश्मनों को नींद न आने देने जैसी स्थिति पैदा कर देता है। उन्होंने कहा, हमारे देश को जिस दिन अपना स्वदेशी आईएनएस पांत मिला उसी दिन भारतीय नौसेना ने औपनिवेशिक प्रतीक से विदाई ली। छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और दृष्टि से प्रेरित होकर, नौसेना ने नया ध्वज अपनाया जो हमारी पहचान और गर्व को दर्शाता है।

आज आईएनएस पांत आत्मनिर्भर भारत और मेड इन इंडिया की भावना का प्रतीक है। कुछ महीनों पहले ही हमने देखा कि सिर्फ इसके नाम से पाकिस्तान की नींदें हराम हो गई थीं। मैं हमारे सशस्त्र बलों को ह्रदयपूर्वक अभिनंदन करता हूं। साथ ही पीएम मोदी ने जवानों के उत्साह और देशभक्ति की भावना को सराहा और उनके साथ दिवाली मनाकर यह संदेश भी दिया कि भारतीय सशस्र बल देश की शक्ति और गौरव के प्रतीक हैं।

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सरहद पर दिवाली: राष्ट्र, राजनीति और मानवता का संगम

किसी भी प्रधानमंत्री का सैनिकों के पास और उनके साथ जाकर त्यौहार मनाना, उनका मनोबल बढ़ाने वाला ही सिद्ध होता है। सैनिकों का मनोबल केवल हथियारों से ही नहीं बल्कि समाज और सरकार के व्यवहार से भी बढ़ता है। प्रधानमंत्री का हर साल जवानों के बीच पहुंचना यह संदेश देता है कि वे देश को सर्वोपरि मानते हैं और देश की सेवा करनेवाले सैनिकों को भी उचित सम्मान देते हैं। इसके मनोवैज्ञानिक असर से सैनिक महसूस करते हैं कि सरहद पर उनकी ड्यूटी केवल आदेश का पालन ही नहीं बल्कि सम्मान का प्रतीक भी है।

अमरपाल सिंह वर्मा
अमरपाल सिंह वर्मा

वहीं देखा जाए तो सीमा पर दिवाली मनाना केवल एक राजनीतिक क्रियाकलाप नहीं है बल्कि यह सत्ता और सैनिकों, नेता और नागरिकों, शहरों और सीमा चौकियों के बीच एक भावनात्मक पुल का काम करता है। जब मोदी बर्फीले पहाड़ों या रेगिस्तान की रेत में दिवाली के मौके पर जवानों का मुंह मीठा कराते हैं तो ऐसा अहसास होता है जिसे बयां करना मुश्किल है। मोदी द्वारा शुरू की गई यह परंपरा उस दीपक की तरह है जो न केवल अंधेरे को मिटाता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि देश का असली उजाला वहीं से आता है जहां वर्दी में हमारे सीमा प्रहरी निगेहबानी की लौ जलाए खड़े हैं। जब सरहद पर दीया जलता है तो राजनीति, राष्ट्र और मानवता एक साथ दिवाली मनाते प्रतीत होते हैं। यह दीया भले ही सरहद पर प्रज्ज्वलित होता है पर उसकी रोशनी से समूचा देश जगमगाता है।

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