किस्सा मुन्ना कुमार के 138 बच्चों का!

Ad

हैदराबाद, मानव इतिहास में तकनीकी गड़बड़ियों ने कई चमत्कार किए हैं। परंतु जो चमत्कार मुज़फ्फरपुर के मुन्ना कुमार के नाम दर्ज हुआ है, वह अद्वितीय है। बिहार की धरती पर पिता-पुत्र संबंधों में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए, मुन्ना को कम्प्यूटर की कृपा से 138 बच्चों का पिता घोषित कर दिया गया। इस ऐतिहासिक भूल ने सरकारी आँकड़ों की सटीकता और भारतीय बाबू तंत्र की दक्षता को हास्य का विषय बना दिया है।

सोचिए, अगर महात्मा गांधी आज जीवित होते, तो इस तकनीकी चमत्कार पर उनकी प्रतिािढया क्या होती। उनके ग्राम स्वराज के सिद्धांत में तकनीक का यह योगदान शायद कल्पना से परे था। मुन्ना कुमार को अचानक अपने 138 बच्चों का पिता बनते देख बिहार का समाज चौंक गया। हालांकि, यह बात जब स्पष्ट हुई कि यह सब कम्प्यूटर की तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम था, तो मुन्ना जी के माथे से पसीना पोंछने वाली सरकार खुद शर्मिंदा हो गई।

अब सवाल यह है कि ऐसी गड़बड़ियाँ होती कैसे हैं। सरकारी कम्प्यूटर (जो आमतौर पर धीमी गति और बार-बार हैंग होने के लिए कुख्यात हैं) ने अचानक इतनी रफ्तार पकड़ ली कि मुन्ना जी को पितृत्व सूची में सबसे आगे ला दिया। ऐसा लगता है जैसे कम्प्यूटर ने सोचा हो, चलो, कुछ नया करते हैं! सरकारी बाबुओं ने भी बिना तथ्य जांचे, इस चमत्कारी उपलब्धि को स्वीकार कर लिया।

138 बच्चों की कहानी कैसे आई सामने

यह मामला डिजिटल इंडिया अभियान का एक अनूठा उदाहरण है। सरकार जब जनता को डिजिटल होने के फायदे गिनाती है, तो शायद यह साइड इफेक्ट गिनाना भूल जाती है। मुन्ना कुमार का यह रिकॉर्ड शायद गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में तो नहीं जाएगा, लेकिन सरकारी फाइलों में यह लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

Ad

मुन्ना को लेकर सोशल मीडिया पर उत्साह की बाढ़ आने की भारी आशंका है! उन्हें डिजिटल पितृत्व योजना के ब्रांड एंबेसडर से लेकर डेटा एरर के जीते-जागते उदाहरण की उपाधियों से अलंकृत किए जाने का भी पूरा अंदेशा है! हालाँकि, सरकारी अधिकारी यह समझाने में व्यस्त हैं कि यह सब एक तकनीकी गलती का परिणाम है। लेकिन, सवाल यह है कि ऐसी गड़बड़ियों की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

तिरहुत स्नातक उपचुनाव की मतदाता सूची को देखकर लोग भले ही हैरान हुए हों, लेकिन मुन्ना कुमार की यह डिजिटल उपलब्धि एक गंभीर भी संदेश देती है। अगर चुनाव विषयक सरकारी डेटा में इतनी बड़ी गलती हो सकती है, तो अन्य योजनाओं और नीतियों की सटीकता भी संदेह से परे नहीं न? क्या यह घटना सिर्फ एक मज़ाक बनकर रह जाएगी, या इससे कुछ सीखा भी जाएगा?

मुन्ना कुमार का मामला दशरथ मांझी की मेहनत के विपरीत, टेक्नोलॉजी की गड़बड़ी का महाकाव्य है। जहाँ मांझी ने पहाड़ तोड़ा, वहीं मुन्ना जी ने कम्प्यूटर सिस्टम की चूक से संतान पर्वत खड़ा कर लिया। वैसे यह भी कुछ पता नहीं कि अनेक हिंदू-मुस्लिम बच्चों को उनके जैविक पिता का नाम अंग्रेज़ी अक्षर एम से आरंभ होने के कारण जिन मुन्ना कुमार की संतानें घोषित किया गया है, वे वास्तव में कहीं हैं भी या नहीं! होंगे तो अपने इस पराम के लिए किसी सर्वोच्च सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे हों! देश की घटती जनसंख्या के गम में दुबलाए जा रहे राजनीतिक काजियों को चाहिए कि उन्हें कम से कम राष्ट्रीय प्रजनन पुरस्कार तो अवश्य दिलवा ही दें।

कहना अनुचित न होगा कि मुन्ना कुमार के 138 बच्चों वाला यह प्रकरण केवल तकनीकी त्रुटि का मामला नहीं है। यह हमारे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक कटाक्ष है, जिसे बिना जांचे-परखे डेटा को सत्य मान लेने की बीमारी है। तकनीकी गड़बड़ियों के इस दौर में, हमें यह समझने की ज़रूरत है कि डिजिटलाइजेशन का मतलब सिर्फ डेटा एंट्री नहीं, बल्कि उसकी सटीकता और सत्यापन भी है। इसलिए, मुन्ना कुमार को धन्यवाद दें, जो इस गड़बड़ी को सबके सामने लाकर सरकारी तंत्र की वास्तविकता को, अनजाने ही, उजागर करने वाले व्हिसिल ब्लोअर बन गए! अब यह सरकार पर है कि वह इस डिजिटल चमत्कार से कुछ सीखे या इसे एक और मज़ाक बनाकर भुला दे।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Ad

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button