आज है फाल्गुन की सोमवती अमावस्या और कल भौमवती अमावस्या
तिथि मुहूर्त
विक्रम पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि आज शाम 5 बजकर 35 मिनट से शुरू हो रही है, जो 17 फरवरी, मंगलवार की शाम 5 बजकर 31 मिनट तक व्याप्त रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, अगर सूर्यास्त से पूर्व एक घड़ी भी सोमवार हो तो उसे सोमवती अमावस्या माना जाएगा। ऐसे में आज यह व्रत रखना शास्त्र सम्मत होगा। मंगलवार को भी अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी तो इस बार भौमवती अमावस्या का भी संयोग बन रहा है।
अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में खास महत्व है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या तिथि को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान-दान करने से बेहद पुण्य फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए इस व्रत को विधि-विधान से करती हैं और पी-पल के वृक्ष की परिक्रमा भी करती हैं। सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान करने से पितृ-दोष से भी राहत मिलती है। आज सोमवारी अमावस्या पर स्नान-दान करना होगा और पितरों को प्रसन्न करने, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने तथा पितृ दोष से जुड़े उपाय दोपहर के समय किए जा सकते हैं।
पूजा विधि
- अमावस्या तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद भगवान शिव और
- माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
- शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा पर 7 या 11 बार (विषम संख्या में) कच्चा सूत लपेटें। ऐसा करने से दांपत्य जीवन सुखद बना रहता है।
- व्रती को इस दिन सुबह स्नानादि के बाद साफ वस्त्र धारण करके पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
इसके पश्चात एक लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाकर शिवजी और मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित करना चाहिए। माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा व आरती करके पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। परिक्रमा करने के साथ 108 बार धागा लपेटें। वृक्ष में शिवजी का वास मानकर दूध, जल, चंदन, अक्षत आदि से पूजा करें।
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