नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एकजुटता हों : सीएम साय

रायपुर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ के सभी लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों, विधानसभा सदस्यों तथा महिला संगठनों को पत्र लिखा है और उनसे सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्यों, विधानसभा सदस्यों तथा महिला संगठनों को पत्र लिखा है। उन्होंने 16 अप्रैल 2026 को संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर प्रस्तावित चर्चा को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण बताते हुए कहा है कि यह मातृशक्ति को लोकतांत्रिक संस्थाओं में समुचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर है।

साय ने सांसदों को लिखे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर प्रस्तावित चर्चा देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री ने सांसदों से आग्रह किया कि वे वर्ष 2029 के लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों से पूर्व इस अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने के विषय में सकारात्मक और सक्रिय भूमिका निभाएं, जिससे मातृशक्ति को उनका समुचित अधिकार शीघ्र प्राप्त हो सके।

संसद में होने वाली चर्चा को बताया ऐतिहासिक पहल

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों को लिखे गए पत्र में कहा है कि अब समय आ गया है कि महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा है, ”मातृशक्ति के नेतृत्व में सशक्तीकरण’ का यह अभियान देश के समग्र विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।” मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से अपेक्षा की है कि वे महिला आरक्षण के समर्थन में छत्तीसगढ़ की आवाज को सशक्त करें तथा इस विषय पर होने वाली चर्चा में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए सकारात्मक वातावरण के निर्माण में अपना योगदान दें।

साय ने महिला संगठनों को लिखे अपने पत्र में महिला संगठनों के निरंतर प्रयासों और योगदान की सराहना करते हुए कहा है कि महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने उल्लेख किया कि 16 अप्रैल को संसद में होने वाली चर्चा केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। साथ ही यह लोकतंत्र को और अधिक समावेशी एवं संवेदनशील बनाने का अवसर है।

संसदीय चर्चा में महिला भागीदारी बढ़ाने की मुख्यमंत्री की अपील

मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि यह सुखद संयोग है कि यह महत्वपूर्ण चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब छत्तीसगढ़ में महतारी गौरव वर्ष मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सदैव महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी इसका प्रमाण है। स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किए जाने तथा महतारी वंदन योजना और रानी दुर्गावती योजना जैसी पहल के सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

यह भी पढे़: नारी शक्ति वंदन अधिनियम नए युग का प्रारंभ : डी.के. अरुणा

मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों और महिला संगठनों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक अवसर पर एकजुट होकर महिला आरक्षण के समर्थन में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें और संसदीय चर्चा में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि सामूहिक प्रयासों से यह पहल न केवल सफल होगी बल्कि देश के लोकतंत्र के सशक्तीकरण की दिशा में एक नए युग की शुरुआत करेगी। (भाषा)

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