हैदराबाद मुफ़्त एमएमटीएस यात्रा योजना के विरोध में उठे सुर

हैदराबाद, शहर के उपनगरीय रेल नेटवर्क में मुफ़्त यात्रा शुरू करने का प्रस्ताव यात्रियों के समूहों को कुछ खास पसंद नहीं आ रहा है। उनका तर्क है कि यह योजना अपने मौजूदा स्वरूप में आर्थिक और परिचालन की दृष्टि से व्यावहारिक नहीं हो सकती है।

तेलंगाना सरकार और दक्षिण मध्य रेलवे (दमरे) के बीच हाल ही में हुई चर्चाओं में कथित तौर पर मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम (एमएमटीएस) पर मुफ़्त यात्रा की सुविधा देने की संभावना पर विचार किया गया है। यह सुविधा तेलंगाना स्थापना दिवस के अवसर पर 2 जून से शुरू हो सकती है। हालांकि इस विचार का उद्देश्य यात्रियों का खर्च कम करना और यात्रियों की संख्या बढ़ाना है, लेकिन रेल यात्री समूहों का कहना है कि जिस 10 करोड़ रुपये आर्थिक आवंटन पर चर्चा हो रही है, वह ज़रूरत से काफी कम है।

एमएमटीएस यात्री संघ के अध्यक्ष नूर अहमद अली के अनुसार, सभी के लिए मुफ़्त यात्रा की लागत, उपयोग बढ़ने के कारण आसानी से दोगुनी हो सकती है। उन्होंने बताया कि जब भी सेवाएँ मुफ़्त की जाती हैं, तो यात्रियों की संख्या (फुटफॉल) में तेज़ी से बढ़ोतरी होती है, जिसमें कभी-कभार यात्रा करने वाले लोग भी शामिल होते हैं। इसका वास्तविक बोझ प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि योजना बनाते समय इस तरह की बढ़ोतरी का ठीक से ध्यान में नहीं रखा गया।

परिचालन संबंधी सीमाएं भी एक और बड़ी बाधा बनी हुई हैं

संघ ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि बिना किसी रोक टोक के मुफ़्त यात्रा की सुविधा का दुरुपयोग हो सकता है, जिससे भीड़ का प्रबंधन करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भी मुश्किल हो जाएगा। रेल यात्रियों का कहना है कि एमएमटीएस ट्रेनों में कई मार्यों पर पहले से ही व्यस्त समय में काफ़ी भीड़भाड़ रहती है। ऐसे में क्षमता में समानांतर विस्तार किए बिना यात्रियों की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी से यह पूरी व्यवस्था और भी ज़्यादा दवाव में आ सकती है। परिचालन संबंधी सीमाएं भी एक और बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

एमएमटीएस नेटवर्क को अभी भी ट्रेनों के रैंक (डिब्बों के सेट) की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे मुख्य मार्गों पर ट्रेनों की आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) सीमित हो गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से किए जाने वाले आर्थिक भुगतान संबंधी वादे, जिसका अनुमान दूसरे चरण के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये है, अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं। इस देरी के कारण नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण के प्रयास भी अटके हुए हैं।

फीडर सेवाओं के साथ एकीकृत करने और हैदराबाद मेट्रो रेल संपर्क स्थापित

एक विकल्प के तौर पर यात्री संघ ने ‘लक्षित प्रतिपूर्ति मॉडल’ का सुझाव दिया है। इस मॉडल के तहत नियमित यात्री पहले टिकट खरीदेंगे और बाद में उसके पैसे वापस (रिफंड) ले सकेंगे। उनका तर्क है कि इस तरीके को अपनाने से यह सुनिक्षित हो सकेगा कि योजना का लाभ केवल वास्तविक यात्रियों तक ही पहुँचे। साथ ही लागत भी अनुमानित दायरे में बनी रहेगी और दुरुपयोग की गुंजाइश भी कम हो जाएगी।

आर्थिक फंडिंग और क्षमता विस्तार के अलावा यात्रा के अंतिम पड़ाव तक सुगम संपर्क सुनिश्चित करने की लंबे समय से लंबित योजनों भी अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। एमएमटीएस स्टेशनों को तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम की ‘फीडर सेवाओं के साथ एकीकृत करने और हैदराबाद मेट्रो रेल के साथ बेहतर संपर्क स्थापित करने संबंधी प्रस्तावों पर अभी तक बहुत ही सीमित प्रगति हुई है। इस बीच यात्रियों का कहना है कि भरोसेमंद फ़ीडर बसों, साझा परिवहन विकल्पों और समन्वित समय सारिणी की कमी के कारण सिस्टम की उपयोगिता पर लगातार असर पड़ रहा है।

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