निजी भूमि पर लगे ताले क्यों नहीं हटाए गए : हाईकोर्ट

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हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मेडचल मल्काजगिरी ज़िले के गंडी मैसम्मा मंडल में सर्वे नं. 166/9/2 के संबंध में विभिन्न अभिलेखों की जाँच के बाद पूरक सेतवारी जारी करने के आदेशों को लागू न करने पर ज़िलाधीश की विफलता पर आपत्ति जताई। अदालत ने राजनीतिक नेताओं की शिकायत के आधार पर पूर्व आदेश को रद्द करने में ज़िलाधीश की गलती पाई। न्यायालय ने एक निजी व्यक्ति की भूमि पर ताला लगाने पर नाराजगी व्यक्त की और तहसीलदार समेत ज़िलाधीश को तत्काल ताला हटाने का आदेश दिया।

ज़िलाधीश ने पूर्व सैनिकों के कोटे के तहत आवंटित 4.38 एकड़ भूमि खरीदने वाले सर्वे अधिकारियों के सभी अभिलेखों की जाँच करने के बाद 17 अप्रैल को पूरक सेतवारी जारी करने के आदेश को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी याचिकाकर्ता एस. जीवेन्द्र रेड्डी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें ज़िलाधीश के 13 अप्रैल के फैसले को चुनौती दी गई थी।

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि पूर्व सैनिक से खरीदी गई भूमि के लिए पूरक सेतवारी जारी की गई थी और अभिलेखों में संशोधन के आदेश जारी किए गए थे। उन्होंने कहा कि ज़िलाधीश ने स्थानीय राजनीतिक नेता आकुला सतीश डी. प्रभाकर रेड्डी की शिकायत पर बिना किसी सबूत के पहले की कार्रवाई रद्द कर दी थी। इस पर उच्च न्यायालय ने ज़िलाधीश के 13 अप्रैल के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगाते हुए एक अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने याचिकाकर्ता के घर पर लगे ताले को हटाने का आदेश दिया और सुनवाई अगले माह तक के लिए स्थगित कर दी।

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