विश्व-राजनीति मेलोनी और ट्रंप के रिश्तों में खटास

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यकीनन मेलोनी तनी हुई रस्सी पर चल रही हैं, जहां जरा सी चूक घातक हो सकती है। वह जानती है कि इटली में अगले वर्ष आम चुनाव है और इतालवी जनता की वैश्विक घटनाक्रम में अधिक रुचि भले ही नहीं हो, किंतु ईरान-अमेरिका की जंग लंबी खिंचने से इतालवियों को महंगाई और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा। इसी अवधारणा के तहत उन्होंने इजराइल के साथ सामरिक – संधि तोड़ ली है। फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के कोर स्टार्मर के साथ उनकी मुलाकात पर अमेरिका और सारे योरोप की उत्सुक निगाहें हैं। अंदाजा यही है कि मेलोनी और ट्रंप के रिश्तों में उपजी खटास नये गुल खिला सकती है।

इतिहास गवाह है कि दुनिया के नौ देशों के पास परमाणु बम हैं, लेकिन केवल एक ने ही अब तक उनका इस्तेमाल किया है और वो देश……. अमेरिका है।

-जियोर्जिया मेलोनी

जियोर्जिया मेलोनी योरोपीय राष्ट्र इटली की प्रधानमंत्री है:, निर्वाचित प्रधानमंत्री। यह बात उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के इस आशय के बयान के उत्तर में कही, जिसमें ट्रंप ने ईरान के इस्लामी बम से लोगों को डराया था और गैर-इस्लामी मुल्कों का समर्थन हासिल करना चाहा था। ट्रंप योटोपीय देशों को हौव्वा दिखाकर आगाह करना चाहते थे कि सावधान, अगर ईरान के हाथों में बम आ गया, तो तुम्हारा क्या हश्र होगा?

ट्रंप के वक्तव्य और मेलोनी के प्रति-वक्तव्य से स्पष्ट है कि अमेरिका और इटली के मध्य दरार दिनों-दिन चौड़ी होती जा रही है। विश्व की सर्वोच्च ताकत अमेरिका का राष्ट्रपति होने के नाते ट्रंप तमाम देशों को तुच्छ या दबैल मानने की ग्रंथि से पीड़ित हैं और जब-तब उन्हें धमकाते या गरियाते रहते हैं। वह किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या प्रतिष्ठित व्यक्ति का मखौल उड़ाने अथवा तंज कसने से भी बाज नहीं आते।

पोप की नसीहत के बावजूद ट्रंप अपने रुख पर कायम

गत दिनों कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरु पोप ने उन्हें आईना दिखाया, किंतु उसके बाद भी वह अपने बड़बोलेपन पर अड़िग रहे। उनके बयान की इतालवी संसद में तीखी प्रतिक्रिया हुई और इटली के सर्वोच्च सदन में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष ने एक सुर में ट्रंप के बयान पर ऐतराज जताया। इतालवी संसद में नेता प्रतिपक्ष सुश्री एली श्लेन ने गरजते हुये कहा कि कोई भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष मेरे देश और मेरी सरकार का अपमान नहीं कर सकता। ट्रंप को खरी-खोटी सुनाते हुये श्लेन ने दो टूक कहा – सुन लो, ट्रंप। भले ही हम राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन हम इतालवी जने अपने देश पर होने वाले हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे, खासकर तुम्हारी तरफ से।

इटली की सेंट्रल लेफ्ट विपक्षी पार्टी डेपोटिक- पार्टी की नेत्री श्लेन की मेलोनी के साथ एकजुटता ने ट्रंप को बेतरह हैरान कर दिया है। कुछ अर्सा पहले तक मेलोनी ट्रंप की विश्वसनीय सखी समझी जाती थीं। एक छमाही पहले की बात है, जब शर्म-अल-शेख में मेलोनी और तमाम नेता गाजा शांति योजना पर विचार के लिये एकत्र हुये थे। तब ट्रंप ने मेलोनी की शान में कसीदे काढ़ते हुये कहा था- यू डोंट माइंड बीइंग काल्ड ब्यूटीफुल, राइट?

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ट्रंप की तारीफ से मेलोनी हुईं असहज

मेलोनी की ओर मुखातिब ट्रंप के बोल थे – आप वाकई खूबसूरत हैं, आपके आने का शुक्रिया। ट्रंप की तारीफ से मेलोनी असहज तो हुईं, लेकिन उन्होंने तारीफ कुबूल कर स्वयं को ट्रंप की सच्ची दोस्त साबित करने में कसर नहीं उठा रखी थी। यही नहीं, वह ट्रंप के पदग्रहण पर भी गयीं और फ्लोरिडा में उनके मार-अ-लागो कंट्री क्लब का फौरी दौरा भी किया। मगर उनका यह रिश्ता कपूर की नाईं उड़ गया।

इसी हफ्ते एक इतालवी पत्र को दिये इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं देने के लिये मेलोनी को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि उनमें साहस की कमी है। ट्रंप ने मेलोनी के रवैये को नाकाबिले-बर्दाश्त बताते हुये कहा कि मेलोनी को इस बात की फा नहीं है कि यदि इटली के पास परमाणु बम होता तो वह दो मिनट में उड़ा देता। ट्रंप ने मेलोनी पर यह फब्ती तब कसी, जब मेलोनी इटली में घरेलू मोर्चे पर अपनी छवि और नीतियों को लेकर विवादों में उलझी हुई थीं।

ट्रंप के प्रति झुकाव के लिये भी वह नुक्ताचीं की शिकार थी और शर्म-अल-शेख में ट्रंप के कमेंट की भी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी। अपनी छवि सुधारने के लिये मेलोनी को मौके की तलाश थी और पोप-प्रकरण ने उन्हें वह मौका थमा दिया। मेलोनी यह बखूबी जानती हैं कि इटली में लोग पोप से प्यार और युद्ध से घृणा करते हैं। इतालवी जनों की इस मनोदशा का मेलोनी ने लाभ उठाया और 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के साझा हमले के बाद ट्रंप से फासला बरतने का क्रम शुरू हुआ। उन्होने सतर्कतापूर्वक ईरान और अमेरिका से सम-दूरी की नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि हमें अयातुल्लाहो का ऐसा ईरान नहीं चाहिये, जिसके पास अणु बम है और जो इटली और योरोप का डराये।

अमेरिका को सैन्य मदद भेजने से इटली का इंकार

ऐसे ही उन्होंने ईरान-अमेरिका जंग में अमेरिका की मदद के लिये इतालवी फौजी भेजने से भी इंकार कर दिया। इसमें शक नहीं कि मेलोनी अपनी छवि को लेकर अत्यंत सचेत हैं। रेफेरेंडम में पराजय ने अतिरिक्त सचेत बना दिया है। इसी के चलते उन्होंने अमेरिका को ताजा जंग में सिसिली के एयरबेस में उपयोग की इजाजत नहीं दी। अमेरिका चाहता था कि उसके फ़ौजी विमानों को यह सुविधा मिले। उनकी सतर्कता का आलम यह था कि वह पोप प्रकरण पर कुछ नहीं कहना चाहती थीं, लेकिन विपक्ष ने उन्हें स्पष्ट रुख अख्तियार करने को बाध्य कर दिया। उन्होंने कहा कि शांति की बहाली की मांग पोप का हक है।यकीनन मेलोनी तनी हुई रस्सी पर चल रही हैं, जहां जरा सी चूक घातक हो सकती है।

डॉ. सुधीर सक्सेना
डॉ. सुधीर सक्सेना

वह जानती है कि इटली में अगले वर्ष आम चुनाव है और इतालवी जनता की वैश्विक घटनाक्रम में अधिक रुचि भले ही नहीं हो, किंतु ईरान-अमेरिका की जंग लंबी खिंचने से इतालवियों को महंगाई और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा। इसी अवधारणा के तहत उन्होंने इजराइल के साथ सामरिक – संधि तोड़ ली है। फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के कोर स्टार्मर के साथ उनकी मुलाकात पर अमेरिका और सारे योरोप की उत्सुक निगाहें हैं। अंदाजा यही है कि मेलोनी और ट्रंप के रिश्तों में उपजी खटास नये गुल खिला सकती है।

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