वाणी से बदल सकता है आपका जीवन
इंसान के व्यक्तित्व, रिश्तों और सफलता में सबसे बड़ी भूमिका उसकी वाणी की होती है। आप कैसे बोलते हैं, किस लहजे में बात रखते हैं और शब्दों का चयन कैसे करते हैं..ये सब आपकी किस्मत की दिशा तय करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में वाणी को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसका सीधा संबंध धन, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा से होता है।
महत्व
कुंडली का दूसरा भाव वाणी का मुख्य भाव माना जाता है। इसके अलावा तीसरा और आठवां भाव भी वाणी से जुड़े होते हैं। खास बात यह है कि यही भाव आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन को भी दर्शाते हैं यानी आपकी बोली जितनी अच्छी होगी, उतना ही जीवन संतुलित रहेगा।
ग्रह प्रभाव
बुध व्यक्ति को अभिव्यक्ति की शक्ति देता है। बृहस्पति वाणी में गंभीरता, ज्ञान और मिठास लाता है। अगर कुंडली में बुध और बृहस्पति दोनों मजबूत हों, तो व्यक्ति की बातों से लोग प्रभावित होते हैं। अगर वाणी से जुड़े भावों पर शनि या राहु का प्रभाव हो, तो व्यक्ति की बोली कठोर, कटु या अपशब्दों से भरी हो सकती है। बार-बार गुस्सा करना, चीखना-चिल्लाना या गलत शब्दों का प्रयोग करने से जीवन में अशुभता बढ़ता है।
उपाय
अगर आप चाहते हैं कि आपकी बोली मीठी हो तो उसका असर आपके भाग्य पर भी दिखे। यहाँ अपनाएं कुछ उपाय।
- सुबह-शाम गायत्री मंत्र का 27 या 108 बार जप करें।
- खान-पान शुद्ध रखें, मांस और मदिरा से बचें।
- पूर्णिमा का उपवास रखें।
- ज्योतिषीय सलाह से पुखराज या पन्ना धारण करें।
गलती से अपशब्द निकल जाए तो तुरंत भगवान के नाम का जाप कर लें। लगातार भगवान के नाम का जप करने से धीरे-धीरे वाणी की गलत आदतें छूटने लगती हैं। इससे मन शांत होता है और जीवन की अशुभता कम होने लगती है।
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