श्रावक जीवन के 11 कर्तव्य अनमोल : भक्तिदर्शनजी

हैदराबाद, श्रावक के 11 कर्तव्य जीवन का सार हैं। श्रावक को 4 प्रकार के सा से आराधना करनी चाहिए। सा सामयिक, सा समाधी, सा साधना और सा संतोष के गुण को धारण कर पर्वाधिराज पर्व पर्युषण की आराधना करें। उक्त उद्गार गोशामहल स्थित शंखेश्वर भवन में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर संघ गोशामहल में भक्तिदर्शनविजयजी म.सा. ने व्यक्त किये।

म.सा. ने कहा कि पर्युषण पर्व के 11 कर्तव्य में संघ पूजा, साधार्मिक भक्ति, यात्रा, स्नात्र महोत्सव, देव द्रव्य ज्ञान, श्रुत भक्ति, रात्रि जागरण, महापूजा, उजमना, तीर्थ प्रभावना और आलोचना आती है। संघ पूजा में जैन समुदाय के सभी सदस्यों को चतुर्विद संघ (साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका) का सम्मान करना चाहिए। साधार्मिक भक्ति में सभी जैनों को एक-दूसरे के प्रति भाईचारा और प्रेम का भाव रखना चाहिए, चाहे वे किसी भी परंपरा के हों। तीर्थयात्रा करना या जो लोग तीर्थ नहीं जा पा रहे, वह तीर्थयात्रियों का सम्मान करें। स्नात्र महोत्सव में तीर्थंकरों की प्रतिमाओं का अभिषेक करना चाहिए।

देव द्रव्य ज्ञान में मंदिरों और जैन संस्थानों के लिए धन का दान करना चाहिए। श्रुत भक्ति के अंतर्गत जैन शास्त्रां का अध्ययन करना और उनका सम्मान करना चाहिए। रात्रि जागरण के अंतर्गत रात में धार्मिक प्रवचन सुनना और ध्यान करना चाहिए। महापूजा के अंतर्गत विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेना चाहिए। उजमना के अंतर्गत उपवास करना और अन्य तपस्या करनी चाहिए। तीर्थ प्रभावना के अंतर्गत जैन धर्म का प्रचार-प्रसार करना और आलोचना के अंतर्गत अपने पिछले कर्मों के लिए पश्चाताप करना और क्षमा माँगना चाहिए।

श्रावक आराधना व पूजन का दिव्य आयोजन

प्रचार संयोजक जसराज देवड़ा धोका ने बताया कि अवसर पर राजयशसूरीशवरजी म.सा. की गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया। आज लोगग्स तप के बियासने का लाभ मोहनलाल वरदीमल बालड ने लिया। प्रवचन में प्रभावना का लाभ भक्तिराज चाँदमल भंडारी जालोर वालो ने लिया। दोपहर में पूजा प्रभावना गुलाबी-देवी शांतिलाल तरावट की तरफ से हुई।

शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के चित्र पर माल्यार्पण करने का लाभ पुखराज रमेश कुमार कामदार परिवार वालों ने, मूलनायक भगवान के अखंड ज्योत का लाभ चंपालाल देवीचंद भंडारी परिवार ने, गौतम स्वामी के दीप प्रज्ज्वलित करने का लाभ मोहनलाल बस्तीमल मुणोत तिलोडा वालों ने, गुरुदेव राजेंद्र सूरीजी के अखंड ज्योति का लाभ रतन देवी अचल चंद्मंडोत परिवार ने, साधु-साध्वी के सालभर के वैयावच्च का लाभ कमला देवी सुमेरमल कवाड़ परिवार ने, प्रभु की अंग रचना का लाभ रामलाल मानमल सालेचा ने, शाम को कुमार पाल राजा बनकर भगवान की आरती करने का लाभ प्रवीण कुमार जुगराज श्रीश्रीमाल ने लिया। सभा का संचालन कैलाश भंडारी ने किया। संघ मंत्री फतेहराज श्रीश्रीमाल व अध्यक्ष चंपालाल भंडारी ने सकल संघ से प्रतिदिन के कार्यक्रम में भाग लेने की विनती की।

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