शिशु खरीद-फरोख्त के मामले में और 9 आरोपी गिरफ़्तार

हैदराबाद, राचकोंडा की मलकाजगिरी एसओटी पुलिस ने चैतन्यपुरी पुलिस के साथ मिलकर शिशु खरीद-फरोख़्त के मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए 9 और आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया और उनके पास से 10 और शिशु मुक्त करवाए गए। गौरतलब है कि इसके पूर्व पिछले माह चैतन्यपुरी और एसओटी पुलिस ने शिशु खरीद-फरोख्त के मामले में मुख्य आरोपी कोला कृष्णवेणी और दीप्ति समेत अन्य आरोपियों को गिरफ़्तार किया था।

पुलिस ने कोला कृष्णवेणी और दीप्ति तथा वंदना को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान तीनों ने एक और मुख्य आरोपी अमूल्या समेत 9 आरोपियों की इस मामले में संलिप्तता का खुलासा किया। 9 आरोपियों के अलावा शिशु खरीदने वाले 18 आरोपियों को भी गिरफ़्तार किया गया। इस मामले में कुल 27 लोगों को गिरफ़्तार किया गया।

एल.बी. नगर स्थित कैम्प कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राचकोंडा पुलिस आयुक्त जी. सुधीर बाबू ने दूसरे चरण की कार्रवाई में इस मामले में 10 आरोपियों के अलावा आरोपियों के पास से शिशु खरीदने वाले दंपत्तियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी।

शिशु तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, 25 शिशु मुक्त

उन्होंने बताया कि आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस ने टीवी टॉवर मलकपेट निवासी पेशे से आशा वर्कर मल्लेश की पत्नी सोमू अमूल्या (29), आदर्श नगर, नागपुर निवासी गजानंद की पत्नी वैशाली भीम राव वासनिक (40), मारुति नगर, कोत्तापेट निवासी लैब टेक्नीशियन जनपल्ली कार्तिक (43), रामेश्वर अपार्टमेंट, घाँसी बाजार निवासी मैरेज ब्यूरो संचालक सज्जन अग्रवाल (41), आसिफाबाद निवासी ईंटों का व्यापारी बोडासु नागराजू (31), विनायकनगर, नेरेडमेट निवासी रामारम अशोक (30), शास्त्रीपुरम, मैलारदेवपल्ली निवासी पुराने कारों की खरीद-फरोख्त करने वाला शेख इस्माइल (31), निजामपेट निवासी पेशे से व्यापारी माचर्ला वंशी कृष्णा (31) और शिशु खरीदने वाले 18 आरोपियों को भी हिरासत में लिया। आरोपियों के पास से 9 सेलफोन और 6 बालिका शिशु व 4 बालक शिशु बरामद किए गए।

उन्होंने बताया कि आरोपी बालिका शिशु दो से तीन लाख रुपये खरीदकर इसे तीन से चार लाख रुपये और बालक शिशु चार से पाँच लाख रुपये में खरीदकर इसे 5 से 6 लाख रुपये में बेच रहे थे। आरोपियों ने मुंबई, कानपुर, रायपुर, अमरावती और हैदराबाद से शिशु खरीदकर उन्हें कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरू, हैदराबाद और गुंटूर में बेचा था।

वर्तमान समय तक इस गिरोह ने 25 शिशुओं की खरीद-फरोख्त की, जिसमें से इसके पूर्व पहले मामले में चार शिशुओं को मुक्त करवाया गया था और इस मामले में 10 शिशु मुक्त करवाए गए। अभी शेष 11 शिशुओं को मुक्त करवाना है। उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी अमूल्या ने 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई की और उसका 2011 के दौरान मल्लेश से विवाह हुआ, जो पेशे से कार चालक है।

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अमूल्या और आरोपियों की शिशु खरीद-फरोख्त की साजिश

विवाह के बाद अमूल्या ने एक लड़की को जन्म दिया, लेकिन बाद में घरेलू कलह के चलते उसका पति उसे छोड़कर चला गया। आशा वर्कर के रूप में कार्यरत अमूल्या आरोपी इस्माइल के संपर्क में आई और इस्माइल ने ही उसे शिशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए लालच दिया। दोनों ने चौटुप्पल निवासी निसंतान महिला कोता सुगुनम्मा से मुलाकात की और दोनों ने वर्ष 2022 के दौरान सुगुनम्मा को एक नवजात शिशु बेचकर 30 हजार रुपये का मुनाफा कमाया।

इसके बाद अमूल्या एक अन्य मुख्य आरोपी कोला कृष्णवेणी और दीप्ति के संपर्क में आई और इनके साथ मिलकर वह सोशल मीडिया के जरिए निसंतान दंपत्तियों और शिशु बेचने वाले दंपत्तियों व महिलाओं से संपर्क कर आठ शिशुओं की खरीद-फरोख्त को अंजाम दिया। अमूल्या ने दीप्ति के साथ मिलकर अपने स्तर पर 10 शिशुओं को खरीदकर बेचा था।

आरोपियों की गिरफ्तारी एल.बी. नगर पुलिस उपायुक्त सी.एच. प्रवीण कुमार, एसओटी पुलिस उपायुक्त एन. नरसिम्हा रेड्डी के नेतृत्व में एसओटी पुलिस इंस्पेक्टर जी. जानय्या और चैतन्यापुरी पुलिस इंस्पेक्टर जी. वेंकटेश्वर राव ने की। सभी आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज़ कर उन्हें अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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