अच्छी नींद: स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी

नींद, विश्रांति का सबसे अच्छा तरीका है, जो ध्यान के बिल्कुल करीब हैं। शेक्सपीयर के अनुसार निंद्रा प्रतिदिन के जीवन के लिए मृत्यु, कठिन परिश्रम के लिये स्नान, घायल मस्तिष्क के लिए शान्तिदायिनी औषधि और क्षति पूर्ण शरीर के लिये अमृत कुण्ड है यह कैसी महान कृपा है, निद्रा देवी की मनुष्य पर।
वह संसार की परेशानियों से क्लांत हो निद्रा देवी की गोद में आकर सो जाता है और दूसरे दिन नव-जाग्रत स्फूर्ति, नव-जीवन, प्रसन्नता एवं उत्साह के साथ उठता है। मज़े की बात तो यह है कि इस महान उपकार के बदले में हमें माँ प्रकृति को कुछ देना नहीं पड़ता है।
मनुष्य के लिए कितने घंटे की नींद पर्याप्त है, इस विषय पर वर्षों से विचार-विमर्श किया जाता रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की नींद की आवश्यकता भिन्न होती है। कोई व्यक्ति तीन-चार घंटे की नींद में ही पूर्ण विश्राम ले लेते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो आठ-दस घंटे सोने पर भी पर्याप्त विश्राम नहीं ले पाते।
जल्दी सोने-जागने की आदत से पाएं स्वस्थ शरीर और शांत मन
अत निद्रा का समय व्यक्ति विशेष को अपनी आवश्यकतानुसार दिनचर्या में समाविष्ट करना चाहिए। शास्त्रकारों के अनुसार, प्रात जल्दी उठना और रात्रि जल्दी सोना उत्तम स्वास्थ्य एवं स्वस्थ मस्तिष्क के लिए सर्वोत्तम है। हमारे हमारे योगी तीन-चार बजे उठ जाते हैं और पूरे दिन स्फूर्तिवान, प्रसन्नचित्त एवं सक्रिय रहते हैं।
पौराणिक शास्त्रां के अनुसार, सूर्योदय से दो-तीन घंटे पूर्व का समय ब्रह्म मुहूर्त कहा गया है, जब अंतरिक्षीय ब्रह्मांड की आध्यात्मिक एवं वैचारिक शक्तियां पृथ्वी के निवासियों को इस समय विशिष्ट अनुदान देती हैं। अत इस समय उठकर आध्यात्मिक साधना करना सर्वश्रेष्ठ होता है। यदि आलस्य वश प्रात जल्दी न उठा गया तो और सुस्ती व उदासी आती है।

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इसलिए बेहतर है कि हम अपने अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए इस कहावत का अनुसरण करें- जल्दी सोये जल्दी जागे, उस बच्चे से दूर-दूर तक दुनिया के सब दुःख दर्द भागे। आज से सोने से पूर्व सभी प्रकार के विचारों को मन से निकालकर स्वस्थ और खाली मन से शय्या पर विश्राम की अवस्था में लेटे हुए अपने मस्तिष्क को पूर्णतया शून्य बनाने का प्रयत्न करें और निद्रा के प्रत्येक झोंके के साथ उस शून्य में विलीन हो जाएं।
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