बाबा केदारनाथ का भीष्म श्रृंगार
हर साल अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का श्रीगणेश होता है। इस यात्रा में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम शामिल हैं। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं और आज केदारनाथ मंदिर के द्वार भी खुलने जा रहे हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलते समय एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें सबसे पहले बाबा केदारनाथ का भीष्म श्रृंगार हटाया जाता है।
हर साल सर्दियों में केदारनाथ मंदिर को भारी बर्फबारी के कारण बंद किया जाता है और उससे पहले बाबा केदारनाथ शिवलिंग पर एक विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसे भीष्म श्रृंगार कहते हैं। इस परंपरा के तहत शिवलिंग पर पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी लगाकर उसे सफेद सूती कपड़े से अच्छी तरह से ढक दिया जाता है। यह परत शिवलिंग को कड़ाके की ठंड और बर्फ के असर से बचाने में मदद करती है।
हर साल दोहराई जाने वाली सदियों पुरानी परंपरा
महीनों तक मंदिर बंद रहने के दौरान यही श्रृंगार शिवलिंग की प्राकृतिक अवस्था को सुरक्षित रखता है, इसलिए इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी कर्नाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय के पुजारियों द्वारा निभाई जाती है, जो पीढ़ियों से इस सेवा को निभाते आ रहे हैं। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है, जिसमें करीब 5 घंटे का समय लगता है। सबसे पहले बाबा केदारनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को शुद्ध करके उस पर शुद्ध घी का लेपन किया जाता है।
फिर शिवलिंग को सफेद सूती कपड़े से पूरी तरह ढक दिया जाता है। यह परत बर्फ, ठंड और कठोर मौसम से शिवलिंग की रक्षा करने के लिए होती है।श्रृंगार पूरा होने के बाद बाबा केदार को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें मौसमी फल और ड्राई फ्रूट्स आदि शामिल होते हैं। इस भोग को आर्घा कहते हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं और बाबा केदारनाथ की डोली को उनके शीतकालीन गद्दी-स्थल की ओर ले जाया जाता है।
यह भी पढ़े : नर्मदेश्वर का हर कंकड़ है शंकर
केदारनाथ धाम के कपाट हर वर्ष अक्षय तृतीया के बाद विधि-विधान के साथ खोले जाते हैं। इस पवित्र कार्य को कर्नाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय के पुजारी संपन्न करते हैं, जो परंपरागत रूप से इस सेवा से जुड़े हुए हैं। कपाट खुलने की प्रक्रिया की शुरुआत भीष्म श्रफंगार को हटाने से होती है। इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। वैदिक मंत्रों द्वारा पंचामृत स्नान कराया जाता है। बाबा केदारनाथ को पुष्पों से सजाया जाता है, भस्म का लेप किया जाता है और चंदन का तिलक लगाया जाता है। इस विशेष श्रृंगार के पश्चात भक्तों के लिए धाम के कपाट बंद किए जाते हैं।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।






