रूस पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री, इस्लामाबाद दौरा ‘सफल’

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मॉस्को, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के समाधान के लिए तेहरान और वाशिंगटन में दूसरे दौर की शांति वार्ता पर जारी अनिश्चितता के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार को रूस पहुंचे। इस दौरान उन्होंने इस्लामाबाद की अपनी यात्रा को “बहुत फलदायी” बताया और कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनका “सार्थक विचार-विमर्श” हुआ।

अराघची पिछले तीन दिनों में इस्लामाबाद की अपनी दूसरी यात्रा के बाद रूस पहुंचे। इस्लामाबाद में उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचने के बाद अपने टेलीग्राम चैनल पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, “हमने पाकिस्तान में अपने मित्रों के साथ सार्थक बातचीत की।

यह यात्रा सफल रही। हमने अपनी हालिया बैठकों के निष्कर्षों का आकलन किया और इस बात पर चर्चा की कि बातचीत किस दिशा में और किन परिस्थितियों में आगे बढ़ सकती है।”अराघची ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को सुलझाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर का जिक्र करते हुए कहा, “वार्ता में प्रगति हुई है।”ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, अराघची ने कहा, “पहले दौर की वार्ता में कुछ प्रगति होने के बावजूद, अमेरिकी पक्ष के रवैये, उसकी असंगत मांगों और गलत दृष्टिकोण के कारण बातचीत अपने उद्देश्यों तक नहीं पहुंच सकी। इसलिए, मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के लिए पाकिस्तान में हमारे मित्रों से परामर्श करना आवश्यक था।”

अराघची ने कहा कि पाकिस्तान की यात्रा ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के युद्ध से संबंधित घटनाक्रमों की समीक्षा करने का एक अच्छा अवसर थी। उन्होंने भरोसा जताया कि “दोनों देशों के बीच यह परामर्श और समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।” अराघची सोमवार तड़के सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां रूसी अधिकारियों और रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने उनका स्वागत किया।

रूस यात्रा युद्ध के बाद समन्वय का अवसर : ईरानी विदेश मंत्री

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनकी रूस यात्रा ने उन्हें इज़राइल और अमेरिका के साथ युद्ध के बाद मॉस्को के साथ समन्वय स्थापित करने का अवसर प्रदान किया है।

अराघची ने ये टिप्पणियां सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए द्वारा जारी एक साक्षात्कार में कीं। ‘यह हमारे लिए एक अच्छा अवसर है कि हम अपने रूसी मित्रों से इस अवधि के दौरान युद्ध से संबंधित घटनाक्रमों के बारे में परामर्श करें।’अराघची ने कहा कि अमेरिका के रवैये के कारण ही इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में देरी हुई।

अराघची ने कहा कि अमेरिका के रवैये के कारण ही इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में देरी हुई।उन्होंने कहा, ‘पिछली वार्ता, प्रगति होने के बावजूद, अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी।’ उन्होंने इसके लिए अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगों’ को जिम्मेदार ठहराया।(भाषा)

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