दवा खरीद में घोटाले पर स्पष्टीकरण दें सीएम : भाजपा वेंकटरमना रेड्डी
हैदराबाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कामारेड्डी से विधायक के. वेंकटरमना रेड्डी ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति और दवा खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण माँगा। नामपल्ली स्थित प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक वेंकटरमणा ने कहा कि राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र गंभीर संकट से गुजर रहे हैं, प्रदेश सरकार को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
विधायक ने कहा कि तेलंगाना मेडिकल सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से लगभग 150 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद में गड़बड़ी होने का आरोप है। उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सही हैं, तो इसकी उच्चस्तरीय जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा से इस मुद्दे पर तत्काल प्रतिक्रिया देने की माँग करते हुए कहा कि राज्य के सरकारी अस्पतालों की हालत बेहद खराब है।
मरीजों को बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टरों के पास मरीजों को देखने के लिए पर्याप्त कमरे नहीं हैं और कॉरिडोर में इलाज किया जा रहा है। दवाइयों, ग्लव्स और सर्जिकल सामग्री की कमी है, जबकि उपकरण होने के बावजूद उन्हें संचालित करने के लिए तकनीकी स्टाफ नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में मरीजों को डिलीवरी जैसे जरूरी इलाज के लिए बाहर से सामान खरीदना पड़ रहा है।
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दवा खरीद प्रक्रिया पर विधायक ने उठाए सवाल
विधायक ने दवा खरीद की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाँच लाख रुपये तक की खरीद लिमिटेड टेंडर से और उससे अधिक की खरीद ओपन टेंडर के जरिए होती है, जबकि बड़े स्तर की खरीद टीएमएसआईडीसी द्वारा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के मामले में एक्सपायरी के करीब पहुँच चुकी दवाओं की बड़े पैमाने पर खरीदी की गई, जिन्हें बाद में उनका उपयोग किए बिना ही नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट सामान्य कचरा नहीं होता, इसमें सिरिंज, केमिकल और दवाएँ शामिल होती हैं।
इसका गलत तरीके से निपटान पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। साथ ही इसके निपटान में अतिरिक्त खर्च होता है, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होती है। विधायक ने सरकार से संबंधित टेंडर की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की माँग करते हुए कहा कि यह मामला उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार से जुड़ा हो सकता है, इसलिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ अस्पतालों में दवाओं की कमी है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये की दवाएँ बेकार हो रही हैं। यह स्थिति राज्य की जनता के साथ गंभीर अन्याय है।
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