कानूनी दिशा-निर्देशों के साथ मानवता भी महत्वपूर्ण : हाईकोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों को कानूनी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए, लेकिन मानवता भी अत्यंत महत्वूपर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दिशा-निर्देश केवल दिशा-निर्देश मात्र है और असाधारण एवं अन्यायपूर्ण परिस्थितियों में इन्हें निरर्थक रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में लिया गया निर्णय तर्क संगत होना चाहिए।

अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद- 14 भी यही प्रावधान करता है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए फैसला सुनाया कि निसंतान विधवा के लिए वीजा विस्तार संबंधी दिशा-निर्देशों का निरर्थक उल्लेख करना और अन्य कारकों पर विचार किए बिना इसे अस्वीकार करना मनमाना है। उन्होंने कहा कि दिशा-निर्देशों के दायरे में आने वाली असाधारण परिस्थितियों में फँसी रूसी महिला के मामले में मानवता की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि भारतीय पुरुष से विवाह के बाद पति की असामायिक मृत्यु के कारण आव्रजन अधिकारियों द्वारा वीजा विस्तार से इनकार करना उचित नहीं है। उन्होंने फैसला सुनाया कि बिना किसी दंड के वीजा का विस्तार किया जाना चाहिए।रूसी महिला अलिना एवजेनीयेन्ना पावलोवा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आव्रजन अधिकारियों द्वारा उनके वीजा विस्तार आवेदन को अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी है।

सास वी. नलिनी ने भी हाईकोर्ट में दायर की याचिका

आवेदन में उन्हें धार्मिक अनुष्ठान करने और अपनी बुजुर्ग सास के साथ जाने की अनुमति देने के लिए कहा। उनकी सास वी. नलिनी ने हाल ही में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई कर अदालत ने फैसला सुनाया। रूसी महिला 2018 से रूस और भारत की यात्रा कर रही है, मुद्देनहल्ली स्थित सत्यसाई संस्थान में अपनी सेवाएँ दे रही है और भगवद गीता का रूसी अनुवाद कर रही है। उन्होंने जुलाई-2024 में भारतीय व्यक्ति स्वरागु से विवाह किया।

दुर्भाग्यवश अक्तूबर-2025 में उसका पति गंभीर रूप से बीमार पड़ गया और उसका निधन हो गया। उन्होंने बताया कि उनके पति के धार्मिक अनुष्ठान करने थे और अपनी बुजुर्ग सास की देखभाल करनी थी। इसलिए बीमारी के कारण उनके लिए रूस की यात्रा करना मुश्किल था। उन्होंने मानवीय आधार पर वीजा की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। आव्रजन अधिकारियों ने उनका और उनकी सास नलिनी का आवेदन खारिज कर दिया, जिस कारण उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।

यह भी पढ़ें… उच्च न्यायालय ने ऋण माफी संबंधी आदेशों को खारिज किया

न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि नियमों के अनुसार पति की मौत के बाद निसंतान विदेशी विधवा महिला को देश में रहने की अनुमति नहीं है और वह अपने देश लौट सकती है। हालाँकि न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारी मानवीय आधार पर विवेक का प्रयोग कर सकते हैं भले ही यह दिशा-निर्देशों के अनुसार उचित हो। उन्होंने टिप्पणी की कि यह कोई घरेलू मामला नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों को प्रभावित करता है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button