जीओ 7 रद्द व फीस बकाया भुगतान की मांग : केटीआर

हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कल्वाकुंट्ला तारक रामाराव ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सरकार पर गरीब व मध्य वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से दूर करने के षड़यंत्र रचने का आरोप लगाया और मांग करते हुए कहा कि फीस पुनर्भुगतान (रीअंबर्समेंट) योजना को बंद करने के उद्देश्य से सरकार के लाए गए सरकारी आदेश संख्या 7 को तुरंत सरकार वापस ले।

केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को लिखे सार्वजनिक पत्र में कहा कि विद्यार्थियों के जीवन को अंधकार में धकेलने वाले जीओ 7 के चलते राज्य के 14 लाख एससी, एसटी, बीसी व माइनॉरिटी विद्यार्थी तथा उनके अभभावक चिंता में हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि वर्तमान समय तक राज्य पर 3.75 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लादने के बावजूद फीस रीअंबर्समेंट की बकाया राशि अदा नहीं कर रही कांग्रेस सरकार ने न कोई बड़ी परियोजना का निर्माण किया है, न ही चुनाव के पहले दी गई 6 गारंटियां व 420 वादे पूरे किए हैं।

भारी कर्ज के उपयोग पर उठे गंभीर सवाल

आखिरकार इतना भारी कर्ज कहां खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल पाठशालाओं में पौष्टिक आहार के अभाव व अन्य सुविधाओं के प्रति सरकार की लापरवाही के चलते अब तक 142 विद्यार्थियों की जानें चली गईं, वहीं कई विद्यार्थी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त आंध्र प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. राजशेखर रेड्डी द्वारा शुरू की गई फीस रीअंबर्समेंट योजना को पूर्व केसीआर सरकार ने यथावत जारी रखा था परंतु कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से राज्यभर के करीब 2,500 से अधिक शिक्षण संस्थानों को फीस की बकाया राशि अदा नहीं की गई है।

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केटीआर ने कहा कि आंदोलनों व कॉलेज बंद के दबाव में आकर सरकार द्वारा 1,207 करोड़ रुपये जारी करते हुए दिए गए टोकनों की राशि का भी अता पता नहीं है। उन्होंने कहा कि 30 महीने से एक पैसा तक नहीं देने वाली सरकार पर अब विद्यार्थियों के खातों में सीधे पैसा जमा करने की बात कर रही है, लेकिन कौन भरोसा करेगा। उन्होंने कहा कि यूरिया संकट से बचने के लिए मोबाइल ऐप का जिस प्रकार नाटक सरकार ने खेला है उसी प्रकार अब जीओ 7 जारी करके नाटकबाजी की जा रही है। उन्होंने सरकार से जीओ 7 रद्द करने और फीस रीअंबर्समेंट की बकाया राशि तुरंत अदा करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांग को हल्के में लिया गया, तो बीआरएस व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।

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