मंत्रोच्चारण के साथ करें शनिदेव को तेल अर्पित

हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय के देवता माना गया है। कहा जाता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनिवार का दिन विशेष रूप से शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ उनकी पूजा करने से जीवन की कठिनाइयों, मानसिक तनाव और आर्थिक समस्याओं में धीरे-धीरे कमी आने लगती है। खासकर शनिवार को शनिदेव को तेल चढ़ाना बेहद फलदायी माना जाता है।

पूजा विधि

शनिवार की प्रातकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शनिवार को काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनना अधिक शुभ माना जाता है। पूजा करते समय मन को शांत और पवित्र रखें।

तेल अर्पित करने की विधि

शनिदेव को तेल चढ़ाने का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद का माना गया है। शाम के समय लगभग 8 बजे तक तेल अर्पण करना विशेष फलदायी होता है। तेल चढ़ाने के लिए लोहे के पात्र का प्रयोग करना चाहिए। उस तेल में अपने चेहरे का प्रतिबिंब देखना चाहिए। इस क्रिया को आत्म-शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

तेल अर्पित करते समय अपनी दृष्टि केवल शनिदेव के चरणों पर ही रहनी चाहिए। यदि मंदिर न जा सपें तो पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर तेल रख सकते हैं या किसी जरूरतमंद को दान भी कर सकते हैं। शनिदेव को तेल चढ़ाते समय निम्न मंत्रों में से किसी एक का उच्चारण करना चाहिए।

ॐ शं शनैश्चराय नम:
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स शनैश्चराय नम:

मान्यता है कि इन मंत्रों का जाप करने से शनि के दोष शांत होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। मंत्रों का जाप करते समय मन को पूर्ण रूप से एकाग्र रखना चाहिए और शनिदेव से अपने जीवन की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिए।

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