एचसीयू मामले की सुप्रीम कोर्ट के पीठासीन जज से स्वतंत्र जाँच कराएँ पीएम : केटीआर

हैदराबाद, भारास के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री के. तारक रामाराव ने कांचा गच्ची बावली स्थित हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (एचसीयू) से संबंधित विवादित 400 एकड़ भूमि पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार से मामले की सुप्रीम कोर्ट के पीठासीन जज द्वारा स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की।

भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में मीडिया से बात करते हुए केटीआर ने याद दिलाया कि हाल ही में एचसीयू भूमि को लेकर राज्य सरकार पर 10 हजार करोड़ रूपये का बड़ा वित्तीय घोटाला करने का आरोप उन्होंने (केटीआर) लगाया था।

सीईसी रिपोर्ट से बीआरएस के आरोपों को मिला बल

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट मीडिया को दिखाते हुए कहा कि इस कमेटी की रिपोर्ट से बीआरएस के लगाए गए आरोपों को बल मिला है, क्योंकि कमेटी ने खुद टीजीआईआईसी तथा सरकार द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात स्पष्ट मानी है। साथ ही मामले की स्वतंत्र जाँच कराए जाने की सलाह सुप्रीम कोर्ट को दी है।

केटीआर ने कहा कि हरियाणा में 2 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एचसीयू में पर्यावरण विध्वंस को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरण पर यदि इतना ही प्रेम है, तो सुप्रीम कोर्ट के पीठासीन जज या किसी भी एक केंद्रीय जाँच एजेंसी से मामले की जाँच करवाएँ। उन्होंने कहा कि मामले पर यदि प्रधानमंत्री हरकत में नहीं आएँगे, तो समझा जाएगा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार के पाप में भाजपा भी भागीदार है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के कदम का बीआरएस इंतजार करेगी। 27 अप्रैल को पार्टी के राजतोत्सव के बाद केंद्र सरकार व केंद्रीय जाँच एजेंसियों के पास व्यक्तिगत तौर पर जाकर शिकायत की जाएगी। फिर भी कोई कदम नहीं उठाए गए, तो भाजपा को जनता की अदालत में घसीटा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तहेदिल से समझते हैं कि कांग्रेस ने एचसीयू में गलत काम किया है और दोषी को सज़ा मिलनी चाहिए, तो तेलंगाना सरकार की वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्र सरकार खामोश क्यों है?

यह भी पढ़ें… केसीआर अंबेडकर की विचारधारा वाले नेता: केटीआर

ईडी-सीबीआई पर केटीआर का कांग्रेस-बीजेपी पर निशाना

यदि केंद्र सरकार जाँच नहीं कराएगी, तो मानना पड़ेगा कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर है।
नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पेश चार्ज शीट के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और नरेंद्र मोदी सरकार पर ईडी और सीबीआई का राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हथियार के रूप में उपयोग किए जाने के आरोपों पर केटीआर ने चुटकी ली।

उन्होंने कहा कि जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर ईडी ने केस दर्ज किया था, तब तो कांग्रेस को ईडी अच्छी लग रही थी। अब बात जब अपने पर आई, तो कांग्रेस को ईडी बुरी क्यों लगने लगी? उन्होंने कहा कि ईडी का गठन तो कांग्रेस ने ही किया था। जहाँ तक सीबीआई की बात है, तो कांग्रेस के शासन में सीबीआई को कांग्रेस ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन कहा जाता था।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करने के मामले में कांग्रेस और बीजेपी का रवैया एक जैसा है। एजेंसियों का दुरुपयोग पहले कांग्रेस ने किया था और अब भाजपा कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से प्रश्न किया कि पहले यह स्पष्ट करे कि ईडी अच्छी है या बुरी। यदि सही है, तो सबके लिए सही होगी, यदि गलत है, तो सबके लिए गलत होगी।

बीआरएस के विधायक कोत्ता प्रभाकर रेड्डी के एक बयान, जिसमें कांग्रेस की सरकार को गिराने संबंधी उल्लेख किया गया है, का केटीआर ने समर्थन करते हुए कहा कि आक्रोश में आकर जनता खुद कह रही है कि इस सरकार को कब तक बर्दाश्त करना पड़ेगा। आखिरकार गिरा क्यों नहीं देते, हम चंदा करके पैसा देंगे। यही बात प्रभाकर रेड्डी ने बताई है। इसमें गलत क्या है।

राजनीतिक दलबदल और कांग्रेस पर केटीआर का तंज

उन्होंने स्पष्ट किया कि बीआरएस का कांग्रेस सरकार को गिराने का कोई इरादा नहीं है। वह तो चाहते हैं कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करे, क्योंकि इस लचर शासन के देखकर जनता अगले 20 साल तक कांग्रेस को तो वोट हरगिज नहीं देगी। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रति जनाक्रोश इतना बढ़ा हुआ है कि कांग्रेस का तख्तापलट करने के लिए सड़कों पर जनता द्वारा उतरकर बंग्लादेश की भांति विद्रोह भी हो जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि हम विकल्प तो चुन सकते हैं, लेकिन उससे होने वाले गंभीर परिणामों से नहीं बच सकते। केटीआर ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों को खरीदने की बात है, तो राजनीति में दलबदलुओं को लेकर आया राम- गया राम की संस्कृति तो हरियाणा में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शुरू की थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 के समय कांग्रेस ने टीआरएस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और तब बीआरएस के 26 विधायक विजयी हुए थे, लेकिन टीआरएस के 10 विधायक कांग्रेस में शामिल करवा लिए गए।

अब कांग्रेस ने फिर बीआरएस के 10 विधायकों को कांग्रेस में शामिल तो करवा लिया है। बेचारे दलबदलू अब परेशान हैं। उन्हें ही पता नहीं के वह किस पार्टी में हैं। उन्होंने विधायक कड़ियम श्रीहरी का नाम लेते हुए कहा कि उनसे पूछने पर वह कह रहे हैं कि पता नहीं वह किस पार्टी में हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल छाती पीट रही है कि सरकार को गिरा दिया जाएगा, लेकिन बीआरएस का ऐसा कोई इरादा नहीं है। अवसर पर राज्यसभा सदस्य वड्डीराजू रविचंद्रा, सांसद मालोत कविता, विधायक कालेरू वेंकटेश व पूर्व मंत्री महमूद अली उपस्थित थे।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button