केसीआर अंबेडकर की विचारधारा वाले नेता: केटीआर
हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कल्वाकुंट्ला तारक रामाराव ने केसीआर की तुलना बरोडा के महाराज से की और कहा कि संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर को बरोडा के महाराज ने उच्च शिक्षा के लिए कोलम्बिया भेजा था, वैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की सरकार ने 10 सालों में दलित वर्ग से संबंधित 7 हजार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रति विद्यार्थी 20 लाख रुपये खर्च करके विदेश भेजने का काम किया।
भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में भारत रत्न डॉ.बी.आर. अंबेडकर की 134वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केटीआर ने कहा कि अंबेडकर के आदर्शों पर चलते हुए केसीआर ने 10 सालों में दलितों के उत्थान के लिए काफी कुछ किया है, जिसमें दलित बंधु योजना प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि दलित बंधु योजना से राजनीतिक नुकसान होने की बात हो रही है लेकिन राजनीति में हार जीत स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि नफा नुकसान की परवाह किए बिना साहस से दलित बंधु योजना को अमल करने का कलेजा रखने वाले दमदार नेता केसीआर को उनकी सेना के सैनिक के तौर पर सेल्युट है, लेकिन ऐसी महान योजना को कांग्रेस सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि अंबेडकर की विचारधारा को अमल करने वाले महान नेता केसीआर हैं, जिन्होंने गुरुकुल पाठशालाओं की स्थापना करके कई विद्यार्थियों को शिक्षित किया।
अमित शाह की आलोचना
केटीआर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिया और आलोचनात्मक लहजे में कहा कि लोकसभा में शाह ने कहा था कि अंबेडकर का नाम लेना फैशन हो चुका है। उन्होंने कहा कि तो इसमें गलत क्या है देश के लिए कुछ अच्छा करने वाले अंबेडकर का नाम लेना सही तो है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण का विरोध करने वाले विचार करें कि आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद 75 साल तक भी सम समाज का निर्माण नहीं हो सका है। अमेरिका में काले – गोरे के भेदभाव के चलते काले अमेरिकियों को भी आरक्षण की रक्षा अफर्मेटिव ऐक्शन के तौर पर दी गई है। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर राज्य का गठन किए जाने का विचार अंबेडकर का रहा है, इसके अलावा उनके विचार से हर राज्य की अपनी एक भाषा हो यह ठीक है लेकिन वह भाषा अनेक राज्यों में भी हो सकती है।
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मुख्यमंत्री रेवंत पर BRS का चोर-धोखेबाज बयान
भारास कार्यकारी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री रेवंत के लिए धोखेबाज, चोर, चिल्लर (मोसागाडू, दोंगा, चिल्लरगाडू) शब्द का उपयोग करते हुए कहा कि संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. अंबेडकर को नहीं पता था कि ऐसे चोर सत्ता चलाएंग। यदि पता होता कि ऐसे धोखेबाज शासन करेंगे तो वे संविधान में अवश्य ही रिकॉल व्यवस्था का प्रावधान रखते। जनता कांग्रेस सरकार से ऊब चुकी है और पूछ रही है कि इस सरकार को हटाने के लिए संविधान में क्या कोई प्रावधान है या नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक बार वोट देने की सजा 5 साल तय है इसलिए जनता अगली बार होशियार रहे।
उन्होंने कहा कि यदि तेलंगाना में अभी के अभी चुनाव कराए जाएंगे तो बीआरएस के हक में वोटों का तूफान आ जाएगा। उन्होंने कहा कि रेवंत सरकार ने सत्ता में आने के लिए जनता को कई लुभावने वादे करके आस दिखाई और जीतने के बाद जनता को धोखा दिया है और मांग की कि धोखे के लिए पूरे समाज से मुख्य्मंत्री सार्वजनिक माफी मांगें।
सुप्रीम कोर्ट स्पीकर व्यवस्था पर भी निर्णय देता, तो बेहतर होता
केटीआर ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा विचारार्थ भेजे गए विधेयकों को 3 महीनों के भीतर निर्णय लेने संबंधी राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसा ही निर्देश दलबदलुओं को लेकर विधानसभा स्पीकर के बारे में भी आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंबेडकर को केवल दलितों के नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो गलत है। अंबेडकर सभी के हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में जिस प्रकार महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भूमिका निभाई थी, उसी प्रकार स्वतंत्रता के बाद अंबेडकर ने आधुनिक भारत की नींव रखी।
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