एआईजी हॉस्पिटल्स और टेरुमो इंडिया के मध्य समझौता
हैदराबाद, एआईजी हॉस्पिटल्स और टेरुमो इंडिया ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ट्रेनिंग को आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी की, जिससे पूरे भारत में मरीज़ों का अच्छा इलाज होगा। कम से कम चीर-फाड़ वाली थेरेपी (न्यूनतम इनवेसिव थेरेपीज़) में मरीज़ों की देखभाल को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए, टेरुमो इंडिया ने एआईजी हॉस्पिटल्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद अपने मुख्य कार्यक्रम एलिवेट आईआर के तहत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी (आईआर) के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (उत्कृष्टता केंद्र) स्थापित करना है।
प्रेस विज्ञप्ति अनुसार, यह साझेदारी मरीज़ों को केंद्र में रखकर स्पष्ट उद्देश्य के साथ तैयार की गई है, यानी इलाज के नतीजों को बेहतर बनाना, इलाज से जुड़े जोखिमों को कम करना, कई तरह की बीमारियों, नसों से जुड़ी बीमारियों, कैंसर से लेकर जानलेवा आपात स्थितियों तक के लिए आधुनिक तथा कम से कम चीर-फाड़ वाले इलाज तक पहुँच बढ़ाना।
इस पहल के तहत एआईजी हॉस्पिटल्स पहले ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर काम करेगा। यह इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट के लिए व्यवस्थित और गहन सीखने का रास्ता देगा। इस कार्यक्रम में सिमुलेशन-आधारित ट्रेनिंग, विशेषज्ञों के सत्र, और केस-आधारित चर्चाएँ शामिल हैं। इसे टेरुमो इंडिया स्किल लैब (टीआईएसएल) का सहयोग मिलेगा, जो आधुनिक ट्रेनिंग सुविधा है और जिसका मुख्य उद्देश्य इलाज से जुड़े कौशल को बेहतर बनाना है।
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एआईजी के साथ साझेदारी से बढ़ेंगी चिकित्सा क्षमताएँ
अवसर पर टेरुमो इंडिया के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर अग्रवाल ने कहा कि हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि मरीज़ों के इलाज के बेहतर नतीजे तभी मिलते हैं, जब डॉक्टरों को अच्छी ट्रेनिंग और सहयोग मिलेगा। एआईजी हॉस्पिटल्स के साथ हमारी साझेदारी, व्यवस्थित और व्यावहारिक तरीके से सीखने के ज़रिए इलाज से जुड़ी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है।
कार्यक्रम में एआईजी हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी ने कहा कि आज भारत ऐसे अहम मोड़ पर खड़ा है, जहाँ पुरानी बीमारियों का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है। वहीं स्वास्थ्य सेवा से लोगों की उम्मीदें, सुरक्षित, तेज़ और मरीज़ों के लिए ज़्यादा सुविधाजनक समाधानों की ओर बढ़ रही हैं। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी इसी बदलाव को दिखाती है।
यह हमें चीर-फाड़ वाली सर्जरी से दूर ले जाकर, सटीक और इमेज-गाइडेड थेरेपी की ओर ले जाती है, जिससे मरीज़ों के ठीक होने की गति और उनके जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग जगहों पर रहने वाले ज़्यादा से ज़्यादा मरीज़, सुरक्षित, तेज़ और ज़्यादा असरदार इलाज का लाभ उठा सकें।
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