एमसीईएमई के 108वें दीक्षांत समारोह में 20 अधिकारियों को बीटेक डिग्री और पुरस्कार
हैदराबाद, सिकंदराबाद स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एमसीईएमई) में आयोजित 108वें दीक्षांत समारोह के दौरान तकनीकी प्रवेश योजना टीईएस-44 पाठ्यक्रम के 20 अधिकारियों, जिनमें मित्र देशों के 4 अधिकारी शामिल थे, को बीटेक की डिग्री प्रदान की गई।



यहां आयोजित समारोह में डिग्रियां मुख्य अतिथि, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) के एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित द्वारा प्रदान की गईं। पाठ्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ छात्र का खिताब हासिल करने वाले लेफ्टिनेंट यश कुमार को प्रतिष्ठित जीओसी-इन-सी एआरट्रैक ट्रॉफी, सर्वश्रेष्ठ छात्र पुस्तक पुरस्कार और डीजीईएमई स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। भूटान सेना के लेफ्टिनेंट कुएंगा तांडिन और लेफ्टिनेंट शिवराज प्रदीप मोरे को क्रमश मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स स्ट्रीम में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए कमांडेंट का रजत पदक प्रदान किया गया।
एयर मार्शल दीक्षित ने स्नातकों को तकनीकी करियर पर बधाई दी
अवसर पर स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए एयर मार्शल दीक्षित ने अधिकारियों को उनके पेशेवर सफर के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा करने और भारतीय सेना के तकनीकी अधिकारियों के रूप में उच्च जिम्मेदारियां संभालने पर बधाई दी। उन्होंने मजबूत इंजीनियरिंग कौशल, प्रणालीगत सोच और अनुशासन प्रदान करने में एमसीईएमई की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यह आप सभी के लिए तेजी से जटिल और प्रौद्योगिकी-आधारित युद्धक्षेत्रों में संचालन करने की आधारशिला बनेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के हालिया परिचालन अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने युद्ध के बदलते स्वरूप और नेतृत्व को प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से एकीकृत करने की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भविष्य के संघर्षों के लिए नैतिक और जन-केंद्रित नेतृत्व, अनुकूलनशीलता और आजीवन सीखने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने नवोदित अधिकारियों के पेशेवर करियर में इस उपलब्धि पर गर्वित माता-पिता को भी बधाई दी। ये सभी अधिकारी अपनी डिग्री प्राप्त करने के बाद अपनी पहली यूनिट में शामिल होंगे।
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स्नातकों ने एआई आधारित स्वचालन सॉफ्टवेयर विकसित कर प्रदर्शनी लगाई
समारोह के अंतर्गत स्नातक होने वाले अधिकारियों द्वारा विकसित नवोन्मेषी परियोजनाओं की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें उभरती प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति को प्रदर्शित किया गया और रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की भावना को उजागर किया गया। लेफ्टिनेंट गोपाल सिंह, लेफ्टिनेंट इरविन्दीप मुल्तानी, लेफ्टिनेंट शिवराज मोरे और लेफ्टिनेंट टंडिन वांगचुक द्वारा विकसित परियोजना आठ सेमेस्टर में डिग्री पाठ्यक्रम के परिणामों और ग्रेडिंग को सुव्यवस्थित करने के लिए एआई की सहायता से स्वचालन सॉफ्टवेयर को सर्वश्रेष्ठ परियोजना घोषित किया गया।
अवसर पर एयर मार्शल दीक्षित ने एमसीईएमई कमांडेंट और कोर ऑफ ईएमई कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नीरज वार्ष्णेय से बातचीत की और एमसीईएमई के विभिन्न संकायों का दौरा किया। उन्हें ड्रोन युद्ध, रोबोटिक्स और मानव रहित प्रणालियों तथा एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और 3डी प्रिंटिंग के लिए नव विकसित उभरती प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं का अवलोकन कराया गया।
भारतीय सेना की परिचालन तत्परता का आधार सीआईएससी उन्नत प्रशिक्षण पद्धतियों, स्वदेशीकरण की दिशा में चल रही अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बारे में भी जानकारी दी गई। एमसीईएमई के कमांडेंट ने गणमान्य व्यक्ति को भारतीय सेना के परिवर्तन के दशक के अनुरूप एमसीईएमई की पहलों और नवाचार, क्षेत्र सेना की समस्याओं के समाधान और सैन्य इंजीनियरिंग में उत्कृष्टता पर एमसीईएमई के अटूट ध्यान के बारे में अवगत कराया। एयर मार्शल दीक्षित ने उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा और प्रदर्शन के लिए अधिकारियों व जेसीओ को मौके पर ही प्रशस्ति पत्र देकर अनुकरणीय उपलब्धियों के लिए अधिकारियों और तकनीशियनों को सम्मानित किया।
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