बदरीनाथ धाम खुले, पीएम मोदी ने की पांच संकल्पों की अपील
देहरादून, उत्तराखंड के उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट छह माह बंद रहने के बाद बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए और पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से संपन्न हुई। पूर्व निर्धारित मुहूर्त के अनुसार, सुबह सवा छह बजे चमोली जिले में स्थित इस मंदिर के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खोले गए और इस दौरान देश-विदेश से आए करीब 15 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे।
इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी उपस्थित रहे। मंदिर के कपाट खुलने के दौरान पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों और सेना के बैंड की मधुर धुनों के साथ हजारों श्रद्धालुओं के जय बदरी विशाल के जयकारों से भक्तिमय हो उठा।
नर और नारायण पर्वत के बीच स्थित इसकी सुंदरता और निखर उठी
इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में माणा और बामणी गाँव की महिलाओं ने झुमैलो नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन गाए। मंदिर को रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे नर और नारायण पर्वत के बीच स्थित इसकी सुंदरता और निखर उठी। मान्यता है कि वर्ष में छह महीने (ग्रीष्मकाल में) श्रद्धालु यहाँ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, जबकि शेष छह महीने (शीतकाल में) देवता स्वयं उनकी आराधना करते हैं, जिसमें मुख्य पुजारी देवर्षि नारद होते हैं।
पीएम मोदी ने ‘डिजिटल उपवास’ की दी सलाह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को श्रद्धालुओं से चारधाम यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखकर उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने का आह्वान करते हुए उनसे पाँच संकल्पों का भी पालन करने का आग्रह किया है। रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित भगवान शिव के धाम केदारनाथ के कपाट खुलने के मौके पर सोशल मीडिया पर अपने एक शुभकामना संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि केदारनाथ सहित चारधाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। उन्होंने कहा कि इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी होते हैं।
मोदी ने सभी श्रद्धालुओं की मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए उनके लिए एक पत्र भी पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में चल रहे विकास के महायज्ञ से चारधाम यात्रा बहुत सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक हुई है, लेकिन इन कामों में प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया जा रहा है।
मैं उत्तराखंड आने वाले हर अतिथि से भी कहूँगा कि वे इस नए अनुभव का आनंद जरूर लें। सभी यात्रीगण अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखने और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे आपको एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।
पाँच संकल्पों का पालन करने का आग्रह किया
पत्र में प्रधानमंत्री ने प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं से पाँच संकल्पों का पालन करने का आग्रह भी किया है, जिसमें उन्होंने स्वच्छता सर्वोपरि को पहला संकल्प बताते हुए उनसे धाम और नदियों के आस-पास सफाई रखने तथा एकल इस्तेमाल प्लास्टिक का उपयोग न करने को कहा है।
दूसरे संकल्प में मोदी ने तीर्थयात्रियों से हिमालयी धरा में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने तथा एक पेड़ माँ के नाम जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आग्रह किया। तीर्थयात्राओं को पुरातन काल से सेवा और सामाजिक समरसता स्थापित करने का माध्यम बताते हुए प्रधानमंत्री ने तीसरे संकल्प के रूप में श्रद्धालुओं से अपनी यात्रा के प्रत्येक दिन, किसी न किसी रूप में, लोगों की सेवा करने का आग्रह किया है।
चौथे संकल्प में प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपने मूल स्थान से चलकर घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पाँच प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करने और वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने को कहा है।
पांचवें संकल्प के रूप में श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन करने का आग्रह करते हुए क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स से प्रदेश की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है। (भाषा )
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