बद्रुका बने विश्वस्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान : राज्यपाल
हैदराबाद, सेठ घासीराम गोपीकिशन बद्रुका एजुकेशनल सोसाइटी तथा बद्रुका कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड आर्ट्स (बीसीसीए) द्वारा शैक्षणिक तथा समाज सेवा के 75 वर्षों के उपलक्ष्य में हीरक जयंती कार्यक्रम का आयोजन आरटीसी एक्स रोड स्थित टीजीआरटीसी कलाभवन में किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यसभा सासंद डॉ. के. लक्ष्मण सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थिति दर्ज करायी। समारोह में शिक्षा को प्रोत्साहन देते हुए उत्तरदायी नागरिकों को आकार देने के उद्देश्य से संस्थान को स्थापित करने वाले राजा बंकटलाल बद्रुका के प्रदेयों का स्मरण किया गया।
75 वर्ष सेवा, समर्पण और दूरदर्शिता की जीवंत विरासत
राज्यपाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सेठ घासीराम गोपीकिशन बद्रुका एजुकेशनल सोसाइटी तथा बद्रुका कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड आर्ट्स के 75 गौरवशाली वर्ष का यह समारोह सिर्फ मील का पत्थर नहीं है। वरन यह सेवा, समर्पण और दूरदर्शिता की जीवंत विरासत है। वर्ष दर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में छात्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन संस्थान की शैक्षणिक दृढ़ता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षा का अंतिम उत्पाद एक स्वतंत्र रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए, जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्रवृत्ति की प्रतिकूलताओं से लड़ सके।
राज्यपाल ने कहा इस कड़ी में संस्थान शिक्षा सहित अनुशासन, समाज सेवा तथा और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में खड़ा है। 75 वर्ष का गौरवशाली सफर पूर्ण करने पर जिष्णु देव वर्मा ने पूरे बद्रुका परिवार को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों को इसी प्रकार नई ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करता रहे। साथ ही आने वाले दशकों तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मार्गदर्शक बना रहे। आज यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि जो शिक्षा और सेवा ज्योति 75 साल पहले जलाई गई, वह इसी प्रकार दीप्तिमान रहे और एक ऐसे भविष्य की ओर ले जाए, जहाँ ज्ञान, मूल्य और नवाचार साथ चलें।
जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि अगले 25 वर्ष अभूतपूर्व चुनौतियाँ और अवसर लेकर आएँगे, इनके लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि वह 2050 में शताब्दी वर्ष तक बद्रुका को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान के रूप में देखना चाहते हैं। एक ऐसा संस्थान, जो भारतीय मूल्यों पर आधारित रहते हुए दुनिया के लिए नेताओं और नवप्रवर्तकों को गढ़े। इस यात्रा में प्रौद्योगिकी निर्णायक भूमिका निभाएगी, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि प्रौद्योगिकी को कभी भी मानवीय भावना का स्थान नहीं लेना चाहिए।
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विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका
राज्यपाल ने छात्रों से आधुनिक शिक्षा और वैश्विक नवाचार में उत्कृष्टता प्राप्त करते हुए अनुभवात्मक शिक्षा, आध्यात्मिकता और भारतीय परंपराओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि सशक्त, प्रबुद्ध और प्रेरित करने वाली होनी चाहिए। बद्रुका इस संतुलन के मशालवाहक बने, ज्ञान को कौशल के साथ, ज्ञान को मूल्यों के साथ और तकनीक को करुणा के साथ सम्मिश्रण करते हुए मजबूत, समावेशी और प्रगतिशील भारत के लिए प्रबुद्ध नागरिकों का निर्माण करने के बारे में योगदान प्रदान करे।
डॉ. के. लक्ष्मण ने कहा कि बद्रुका तेलंगाना के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में अपनी पहचान रखता है। यहाँ के कई पूर्व छात्र दुनिया भर में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने छात्र जीवन में बद्रुका में प्रवेश की उच्च माँग को याद करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने के बारे में नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के बारे में भी है। डॉ. लक्ष्मण ने छात्रों को विकसित भारत के राजदूत की संज्ञा देते हुए कहा कि भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बदलने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
डॉ. लक्ष्मण एनडीएलआई, ई-विद्या, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और स्टार्टअप सपोर्ट जैसी राष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए छात्रों से नवाचार और उद्यमिता के पथप्रदर्शक बनने का आह्वान किया। सेठ घासीराम गोपीकिशन बद्रुका एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष लक्ष्मीनिवास शर्मा ने छात्रों से नौकरी चाहने वालों की बजाय नौकरी देने वाले बनने का आग्रह किया। मानद सचिव श्रीकिशन बद्रुका ने कहा कि भारत का भविष्य वाणिज्य शिक्षा में भी निहित है।
शैक्षणिक उत्कृष्टता बद्रुका संस्थान की पहचान
श्रीकिशन बद्रुका ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता बद्रुका की पहचान रही है। उन्होंने संस्थान की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एनसीसी कैडेट 50 से अधिक वर्षों से दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में बद्रुका का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बद्रुका उद्यमिता प्रकोष्ठ ने पाँच उद्यमों का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया। इसके अतिरिक्त दुनियाभर में एक लाख से अधिक पेशेवरों का पूर्व छात्र नेटवर्क है, जो मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने बद्रुका कॉफी टेबल बुक और 75 में वर्ष के उपलक्ष्य में संस्थान के स्मृति रजत सिक्के का विमोचन किया। अवसर पर सोसाइटी के संयुक्त सचिव रवि बद्रुका, कोषाध्यक्ष राजेंद्र बद्रुका, बद्रुका कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी. मोहन कुमार, प्रबंध समिति के सदस्य, प्राध्यापक, पूर्व विद्यार्थी, कर्मचारी, छात्र सहित अन्य उपस्थित थे। महानिदेशक प्रो. एस. अभिराम कृष्णा ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि बद्रुका संस्थान राष्ट्रीय प्रगति में चरित्र और मूल्यों का समावेश कर विकसित भारत के लक्ष्य में सतत योगदान देता रहेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का नेटवर्क संस्थान की सबसे बड़ी विरासत है। यह हीरक जयंती समारोह अतीत का उत्सव और भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता है।
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