आकाश बनें

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आक्रोश कब आता है? आक्रामकता कब आती है? जब दूसरे के लिए हृदय तल में तनिक मात्र भी प्रेम न हो, उनके विचारों या उनकी भावनाओं के प्रति संवेदना न हो, तब हिंसा का क्षेत्र पनपता है। ऐसे संकीर्ण क्षेत्र में नकारात्मकता निवास करती है, जिसमें सांप्रदायिक संघर्ष का मूल पनपता है। जब दूसरों की मान्यता, विचारों का औचित्य एवं उपयोगिता को अस्वीकार किया जाता है, तब सौहार्द भाव समाप्त होकर संघर्ष वैमनस्य प्रारंभ होता है। यह हर संघर्ष का मूल कारण है। अपनी संकीर्णता से बाहर निकलने का उपाय है- भीतर के क्षेत्र को विशाल करें, आकाश जितना विराट।

आकाश में नीला रंग आपके अंदर असीमता जाग्रत करने का सामर्थ्य प्रदान करता है। जब भी द्वेष या आक्रोश के कारण आपके अंदर की सारी ऊर्जा एक काँटे में परिवर्तित हो जाती है, संकीर्ण व ठोस हो जाती है, ऐसे में आकाश का ध्यान करें। जैसे-जैसे यह ध्यान करेंगे, ऐसी अनुभूति होगी, जैसे अंदर सब कुछ खुल रहा है। पूर्ण विस्तार आ जाएगा। अंदर सहिष्णुता का भाव जगेगा, आप दूसरे को स्वीकार करने लगेंगे।

आकाश जैसी विशालता से मन को मुक्त करने की सरल साधना

अंदर में जो अस्वीकार का भाव था, उसे इस तरह समझें कि पत्थर किसी को स्वीकार नहीं करता है, परंतु नभ सभी को स्वीकारता है। संत तुकाराम अपनी आध्यात्मिक स्थिति को व्यक्त करते हुए कहते हैं- तुका झालासे आकाशाएवढा। मैं आकाश जितना हो गया हूँ। आकाश जैसे बनने का तात्पर्य है, सबको समाहित करने का सामर्थ्य रखना। किसी को अस्वीकार न करना, किसी की उपेक्षा न करना। आकाश की साधना ऐसे समय में साधना करें, जब आकाश बहुत साफ है।

आराम से लेट जाएँ। जिस दिशा में सूर्य है, उस दिशा में न देखें और उसकी विपरीत दिशा में भी न देखें। दायें या बायें जहाँ तक नीला आकाश दृश्यमान हो, वहाँ तक देखते चले जाएँ। केवल आकाश को देखते रहें। इसके अतिरिक्त कुछ नहीं करें। कोई मंत्र नहीं, कोई तंत्र नहीं, केवल आकाश के साथ स्वयं को तन्मय करें। कोई चिन्तन नहीं, कोई सुझाव नहीं, कोई ध्यान नहीं, कुछ भी नहीं। केवल उस नीले आकाश की विशालता में स्वयं को डुबोते चले जाएँ।

आँखें खुली रखें । जब तक आप आँखों को अपलक खुला रख सकते हैं, उन्हें खुला रखें। यदि एकाध क्षण के लिए बंद करनी है, तब कर लें। जब भी बंद करें शाम्भवी मुद्रा में बंद करें- अर्थात् आधी खुली और आधी बंद। अधमूँदी पलकें रहनी चाहिए। यह प्रयोग 15 मिनट के लिए करें। पहली बार कर रहे हैं तब उससे कम समय के लिए भी कर सकते हैं, परन्तु 15 मिनट से अधिक समय के लिए न करें। जैसे-जैसे आपके अंदर का आकाश खुलता जाएगा, वैसे-वैसे अंदर सारे बदलाव शुरू हो जाएँगे।

आकाश साधना: बेहतर नींद, रिश्ते और मन की शांति का सरल उपाय

आकाश की साधना के अन्य और भी लाभ हैं। सहज और अच्छी निद्रा के लिए सोते समय आँखें बंद करके गहरे नीले आकाश का ध्यान करें। ऐसा करते हुए, सो जाएँ। कुछ ही दिनों में निद्रा की गुणवत्ता में सुधार दिखाई देगा। जिन्हें जल्दी उठने में दिक्कत आती है, वह भी यह प्रयोग कर सकते हैं। जिन्हें किसी लत से बाहर निकलना है, चाहे वह लत हिंसा की हो, सिगरेट, गुटखा या शराब की, उनके लिए बहुत अच्छा प्रयोग है। लम्बी श्वास के साथ आकाश के नीले रंग का ध्यान करें।

आकाश की साधना से अपने रिश्तों में बदलाव ला सकते हैं। एक व्यक्ति मेरे पास आए और कहा कि मैं अपने बेटे से बहुत प्रेम करता हूँ परंतु वह मुझे अपना दुश्मन समझता है। जब मैं उसे किसी बात के लिए रोकता हूँ, तो उसे बहुत गुस्सा आता है। मैंने उनसे कहा कि आज से अपने पुत्र को खेलने से मत रोकिए। परंतु एक काम करें, अपने पुत्र से अनुरोध करके उसका हाथ अपने हाथ में लेकर आकाश का ध्यान 15 मिनट तक करें।

इस प्रयोग को आप कुछ दिनों के लिए करके देखें। कुछ ही हफ्तों में उन्होंने आकर कहा कि उन दोनों के रिश्ते में प्रेम बढ़ने लगा है। जिन्हें अपने क्रोध, अहंकार व द्वेष की प्रवृत्ति से छुटकारा पाना है, वे अन्य प्रयोग भी कर सकते हैं, किन्तु आकाश की साधना को प्राथमिकता दें। आकाश सभी का है, सभी उसका उपयोग करें, प्रयोग करें, विराटता का दिव्य अनुभव करें। इसमें कोई कर्मकाण्ड नहीं है, कोई संप्रदायवाद नहीं है। जब मौसम अच्छा हो, तो उसका पूर्ण उपयोग करते हुए, ध्यान करें।
अब तक कई साधकों ने आकाश-दर्शन का प्रयोग किया है और सुखद परिणाम की प्राप्ति हुई है। जैसे-जैसे आप आकाश की साधना करते जाएँगे, कुछ नया प्राप्त होगा, नई सोच उभरेगी।

ध्यानमग्न व्यक्ति, जो लेश्या के माध्यम से आत्मपरिवर्तन कर रहा है।
प्रवीण ऋषि

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