भाई हो गये ब्रदर

दिवाली के बाद अब आया है भाई दूज का पर्व। इस दिन बहनें अपने भाई को लाल रोली से टीका लगाती है और उनकी लंबी उम्र की कामना करती है। वहीं देखा जाए तो भाई दूज की असली गर्मी लाल रोली में नहीं बल्कि बहन की हथेली की ऊष्मा में होती है जिससे वह भाई को बड़े प्यार से टीका लगाती है। पर अब समय पूरी तरह से बदल गया है और रिश्तों के डिजिटल डिटर्जेंट में भाई नहीं, बस ब्रदर रह गए हैं और देसीपन तो पूरी तरह से धुल गया है।

कभी बहन के हाथों का टीका भाई के माथे पर आग बन जल उठता था, अब वही रोशनी मोबाइल पीन पर ठंडी पड़ गई है। भाई बिजी हैं और बहनें अब ऑनलाइन टीका लगाती हुई देखी जा सकती हैं। शगुन भी हथेली पर नहीं आता बल्कि मोबाइल में आता है। दोनों मिलकर सिर्फ रस्म अदायगी करते नजर आते हैं। बहनें भी कम व्यस्त नहीं हैं। उनके पास भी अब उतना समय नहीं रह गया है कि भाई के आने की प्रतीक्षा करें।

पर इतना तो जरूरी है कि अपने भाई के नंबर पर सिर्फ हैप्पी भाई दूज टाइप न करें। एक बार फोन मिलाएँ, उसकी आवाज सुनें, अपनी आवाज सुनाएं क्योंकि पीन के उस पार अभी भी कहीं एक भैया अपनी बहन की आवाज का इंतजार कर रहा होता है। वे भी क्या दिन हुआ करते थे जब भाई दूज के दिन भाई सुबह-सुबह नहा-धोकर बहन के घर पहुँचता था, वहीं बहन उसके माथे पर टीका लगाती, थाली में दीप और दिल में अपनापन लिए हुए। ये वो दौर था जब बहन की मिठाई में प्यार घुला होता था क्योंकि वह अपने हाथों से भाई की पसंदीदा मिठाई बनाया करती थी, अब तो मिठाई भी ऑनलाइन बुक होती है और डिलीवरी ब्वॉय देकर चला जाता है।

रिश्तों की बदलती गर्माहट और भाई दूज का महत्व

रिश्तों की वह देसी गरमाहट, अब फ्रिज में रखे जूस जैसी ठंडी हो गई है। रिश्तों का यह आधुनिकीकरण हमें दिखने में भले ही सुलझा हुआ लगे पर असल में कहीं न कहीं हमने अपनी जड़ों से रिश्ता ढीला कर लिया है। अब रिश्तों में भी पहले जैसी बात नहीं रही, सब कुछ दिखावा भर रह गया है।

भाई अब ब्रदर बन गया है, तो बहन अब सिस में परिवर्तित हो गई है। न दोनों के रिश्ते में पहले सी जिद है, न झगड़े, न वो मीठी शिकायतें। पहले बहन के आँसू देखकर भाई का खून खौल उठता था, अब वही आँसू बस एक इमोजी में सिमटकर रह गए हैं और वो बचपन का जिद्दी भाई जो झगड़ा होने पर बहन की गुड़िया की नाक तोड़ देता था, पर अगले ही पल बहन के साथ बैठकर होमवर्क करते वक्त उसका साथ भी देता था, कहीं गुम हो गया है।

यह भी पढ़ें… भारत में डिजिटल सुनामी : जेन-जी हो गए इंटरनेट लवर्स

एक भाई का कहना है कि भैया दूज एकमात्र ऐसा दिन है जब मैं बड़े भाई जैसा अनुभव करता हूं, अन्यथा मुझे लगता है कि मैं तो अपनी बहन का ड्राइवर बन गया हूं। यह बात भी आम है कि हर भाई अपनी बहन को मजाक में कहता मिल जायेगा कि हम एक-दूसरे से चाहे लड़ें, झगड़ें, पर यह बर्दाश्त नहीं है कि कोई और मेरे सामने तेरा अपमान करे, यह सिर्फ मेरा ही अधिकार है। एक बर की बात है अक नत्थू गैल एक छोरी देखकै सुरजा ताऊ बोल्या- हां रै या छोरी तेरी के लाग्गै है? नत्थू बोल्या- मेरा इस गैल दूर का रिश्ता है। ताऊ बोल्या- वो क्यूकर? नत्थू बोल्या- बात या है अक इसकै अर मेरे बीच छह बहन-भाई और हैं।

शमीम शर्मा

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button