परिस्थितियों में परिवर्तन के बिना दूसरी याचिका अमान्य : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि किसी आपराधिक मामले को खारिज करने के लिए दायर याचिका के बाद मामले की परिस्थितियों में कोई बदलाव न होने पर उसी आधार पर दूसरी याचिका दायर करना अमान्य है।
अदालत ने कहा कि जब एक ही मामले पर दूसरी याचिका दायर की जाती है, तो परिस्थितियों में बदलाव दिखाया जाना आवश्यक है और बिना किसी बदलाव के दूसरी याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। गंगुला सैदुला नामक व्यक्ति ने नलगोंडा ज़िले के नकरेकल अदालत में लम्बित एक आपराधिक मामले को खारिज करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जे. श्रीनिवास राव ने हाल ही में इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पानुगंटी विजय कुमार ने दलील देते हुए कहा कि यद्यपि मामले को खारिज करने के लिए वर्ष 2024 में याचिका दायर की गई थी, लेकिन उस समय मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता ने केवल निचली अदालत में पेश होने से छूट की माँग की थी। मामला फिर से शुरू नहीं हुआ है, इसीलिए उन्होंने इसकी जाँच कराने का आग्रह किया है।
कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर अदालत सख्त
अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता जितेन्दर राव वीरामल्ला ने आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद दूसरी याचिका दायर करने की अनुमति कानून में नहीं है। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि आपराधिक मामले को खारिज करने के लिए दूसरी याचिका दायर करने पर कोई विशेष रोक नहीं है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पहली याचिका दायर करते समय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दायर की गई याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
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न्यायाधीश ने कहा कि अतीत में उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थगन के माध्यम से राहत माँगना वैध नहीं है। न्यायाधीश ने कहा कि जब पहली बार याचिका दायर की गई थी, उसके बाद मामले की परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अतीत में केवल उपस्थिति से छूट माँगी गई थी और बाकी आग्रह को वापस लेकर नई याचिका दायर करना वैध नहीं है। उन्होंने कहा कि चूँकि परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसीलिए याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
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