न्यायालय : गद्दे, तकिये और बंकर बिस्तरों की निविदाओं की जाँच का आदेश
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य के 252 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में गद्दे, तकिये सहित 45,360 बंकर बिस्तरों की आपूर्ति के लिए जारी निविदाओं के संबंध में याचिकाकर्ता के अनुरोध पर सतर्कता आयोग द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर विद्यालय शिक्षा विभाग के सचिव को जाँच करने का आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि उचित समय सीमा के भीतर कार्रवाई की जानी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी खरीद और सम्बद्ध संगठनों द्वारा किए गए अनुबंधों में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हस्तक्षेप तब ही संभव है, जब निर्णय लेने की प्रक्रिया एकतरफा, दुर्भावनापूर्ण और नियमों का उल्लंघन करने वाली हो।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य सतर्कता आयोग ने याचिकाकर्ता के अनुरोध के अनुसार जाँच करने और उचित कार्रवाई करने के लिए स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखा था, लेकिन विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अदालत ने स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव को उस पत्र की गहन जाँच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया।
यह भी पढ़ें… आशु रेड्डी के खिलाफ जाँच पर रोक से इनकार
बंकर बेड समझौते की जांच की उठी मांग
भारास नेता व पूर्व विधायक पी. सुदर्शन रेड्डी ने कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालयों को गद्दे और तकिये सहित बंकर बेड की आपूर्ति के लिए किए गए पूरक समझौते की जाँच की माँग वाली याचिका के बावजूद कोई कार्रवाई न किए जाने को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि निविदा अधिसूचना में 120 दिन के भीतर बिस्तरों की आपूर्ति और विलम्ब के लिए मुआवजे का प्रावधान था। हालाँकि ठेकेदार मेथेडेक्स सिस्टम्स और मफतलाल इंडस्ट्रीस निर्धारित समय के भीतर आपूर्ति करने में विफल रहे। अनुबंध रद्द कर दिया गया, सुरक्षा राशि जब्त कर ली गई, उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया गया और प्रावधानों के अनुसार नई निविदाएँ आमंत्रित नहीं की गई। उन्हीं ठेकेदारों के साथ एक अवैध सहायक अनुबंध किया गया। हालाँकि पूर्ण सतर्कता जाँच का अनुरोध किया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सतर्कता आयोग के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उन्होंने अधिकारियों को जाँच करने और कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था। सरकारी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को बिस्तरों की आपूर्ति रोकने के लिए याचिका दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि सतर्कता आयोग के समक्ष की गई शिकायत निराधार थी। दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव को जाँच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



