आशु रेड्डी के खिलाफ जाँच पर रोक से इनकार
हैदराबाद, विशाखापट्टनम की रहने वाली कोय्या वेंकट अश्विनी रेड्डी उर्फ आशु रेड्डी और उनकी माँ के. यशोदा रेड्डी को उच्च न्यायालय ने कोई राहत नहीं दी। इन दोनों पर एक एनआरआई व्यापारी से शादी करने का वादा कर धोखाधड़ी करने का आरोप है। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की जाँच पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई करने से छूट देने की माँग वाली उनकी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
हैदराबाद के ए. सत्यनारायण मूर्ति ने हैदराबाद सीसीएस पुलिस में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने लंदन में रहने वाले उनके पुत्र वी. धर्मेन्द्र से शादी करने का वादा कर उसके पास से बड़ी रकम वसूली है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जे. श्रीनिवास रेड्डी ने आशु और उनकी माँ यशोदा रेड्डी द्वारा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई न करने का आदेश जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने मामले की जाँच पर रोक लगाने और झूठे आरोपों के आधार पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया। उन्होंने याचिका की जाँच पूरी होने तक पुलिस जाँच रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया।
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10.5 करोड़ रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर का खुलासा
पुलिस की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक जितेन्द्र राव वीरमल्ला ने दलील देते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप के सबूत मौजूद हैं और इस संदर्भ में मामले की जाँच किए बिना याचिकाकर्ताओं द्वारा रोक लगाने की माँग करना गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता के बेटे से याचिकाकर्ताओं को 10.5 करोड़ रुपये का पूरा हस्तांतरण ऑनलाइन किया गया था। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में जाँच जारी रखना आवश्यक है और उन्होंने कोई अंतरिम आदेश जारी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने याचिकाकर्ताओं को धारा 41ए के तहत नोटिस जारी किए हैं और पूरी जाँच कानून के अनुसार की जा रही है।
दलील सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं के अनुरोध के अनुसार अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने पुलिस को अपने तर्कों के साथ जवाब दायर करने के लिए नोटिस जारी की। इसके साथ ही अगली सुनवाई 9 जून तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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