दानं पितृणाम तुष्टिकरं भवेत्
सर्वपितृ अमावस्या को खास महत्व दिया जाता है। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों की आत्माएं विदा लेने से पहले घर-परिवार को आशीर्वाद देती हैं। यदि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ दान किया जाए तो न सिर्फ पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि घर-परिवार पर धन, सुख और समृद्धि की वर्षा भी होती है।
सर्वपितृ अमावस्या को पितृपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना गया है, जब हर परिवार अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और दान करता है। शास्त्रां के अनुसार, इस दिन श्रद्धा से किए तर्पण और दान से पितृ न केवल प्रसन्न होते हैं बल्कि परिवार को धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद भी देते हैं। खास बात यह है कि इस दिन दान की एक विशेष टोकरी बनाकर मंदिर, ब्राह्मण या जरूरतमंद को देने की परंपरा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
दान की टोकरी
सर्वपितृ अमावस्या पर दान को अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रां में कहा गया है कि दानं पितृणाम तुष्टिकरं भवेत्, यानी पितरों को तृप्त करने का सबसे श्रेष्ठ साधन दान है। इसीलिए घर में अलग से दान की टोकरी तैयार करने की परंपरा है। दान की टोकरी में शास्त्रां में पवित्र और शुभ मानी जानी वाली वस्तुएं रखी जाती हैं।
- पितरों की तृप्ति के लिए अन्न में चावल, गेहूं और तिल जरूर रखें।
- सफेद या पीले वस्त्र दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
- लौकी, कद्दू या हरी सब्जियां दान करने से पितृदोष का निवारण होता है।
- तांबे या पीतल के बर्तन दान में देने से लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।
- थोड़ी-सी दक्षिणा और गुड़, खील, मिठाई टोकरी में रखना शुभ होता है।
विधि
सुबह स्नान के बाद पितरों का स्मरण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्राद्ध मंत्रों के साथ जल अर्पण करें। फिर दान की टोकरी किसी ब्राह्मण, गौशाला या जरूरतमंद को दें। ध्यान रहे, दान हमेशा प्रसन्न मन से करें, तभी उसका फल कई गुना बढ़ता है।
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महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर इस तरह दान करने से पितृ आत्माएं तृप्त होती हैं और आशीर्वाद देती हैं। घर से दरिद्रता और बाधाएं दूर होती हैं। परिवार में लक्ष्मी कृपा बनी रहती है। संतान सुख और वंशवृद्धि में आ रही अड़चनें दूर होती हैं। इस सर्वपितृ अमावस्या दान की टोकरी बनाकर पितरों को प्रसन्न करें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
–नेहा अवस्थी
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