जीवन में अनुशासन अत्यन्त आवश्यक : श्रुतमुनिजी म.सा.
हैदराबाद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमणोपासक संघ के तत्वावधान में रामकोट स्थित गुरु गणेश जैन भवन में आयोजित प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए श्रमणसंघीय उप-प्रवर्तक महाराष्ट्र भूषण श्रुतमुनिजी म.सा. ने कहा कि साधु और श्रावक दोनों के लिए विवेक महत्वपूर्ण है। बिना विवेक के वाणी का उपयोग करने पर मित्र भी शत्रु हो जाता है।

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इसके विपरीत विवेकपूर्ण ढंग से बात करने पर दुश्मन भी दोस्ती का हाथ बढ़ाता है। आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, म.सा. ने कहा कि जीवन में अनुशासन अत्यन्त आवश्यक है। सर्वप्रथम स्वयं को अनुशासन में रखना चाहिए। इसके बाद ही दूसरों को अनुशासन के लिए प्रेरित करना चाहिए। संघ के सहमंत्री राजेश सुराणा ने प्रवचन सभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के प्रति आभार जताया।
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