आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी एवं सीताराम चतुर्वेदी के अवदान पर हुई चर्चा
हैदराबाद, पंडित विद्यानिवास मिश्र जन्म शताब्दी वर्ष के अंतर्गत अर्दली बाजार स्थित राजकीय जिला पुस्तकालय, वाराणसी में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अवसर पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी एवं आचार्य सीताराम चतुर्वेदी के अवदान पर गहन चर्चा की गयी।
दीप प्रज्ज्वलन एवं आचार्यों के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सरस्वती वंदना पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने प्रस्तुत की। स्वागत वक्तव्य विद्याश्री न्यास के सचिव डॉ. दयानिधि मिश्र ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजरी पांडे ने किया।
बसंत महिला महाविद्यालय, हिन्दी विभाग की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शशिकला त्रिपाठी ने आचार्य द्विवेदी को आलोचना की नई परंपरा का सूत्रधार बताते हुए कहा कि बड़ा लेखक वही है, जो समकालीन ही नहीं, अगली पीढ़ी को भी दिशा दे। द्विवेदीजी काशी की पांडित्य परंपरा के उद्भट विद्वान थे।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की पूर्व प्रोफेसर एवं जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया की पूर्व कुलपति प्रो. कल्पलता पांडे ने आचार्य सीताराम चतुर्वेदी के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ओजस्वी वक्ता, निर्भीक, अनुशासनप्रिय और सृजनशील चतुर्वेदीजी ने जीवन चरित्र, उपन्यास, कहानी, ललित निबंध, संस्मरण, रेखाचित्र, गद्य की प्राय हर विधा में सार्थक सृजन किया।
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साहित्यकारों के योगदान को बताया अत्यंत महत्वपूर्ण
कथा लेखिका डॉ. भगवंती सिंह ने कहा कि आज के इस आयोजन में जिन दो विशिष्ट साहित्यकारों पर विस्तार से चर्चा हुई, उनका हिन्दी साहित्य के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। समारोह में हैदराबाद के वरिष्ठ कवि वेणुगोपाल भट्टड़ ने हाईकुओं एवं हास्य व्यंग्य रचनाओं का पाठ कर सभी को भाव विभोर किया। सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि दक्षिण भारत में हिन्दी की अलख जगाने वाले भट्टड़ की रचनाएँ समाज का आइना हैं। हाईकुओं में गहरी बात कह देना हो या हास्य व्यंग्य के माध्यम से विसंगतियों पर प्रहार करना, उनकी शैली श्रोताओं को झकझोरती भी है और गुदगुदाती भी है।
अवसर पर प्रो. प्रीति जायसवाल, डॉ. प्रकाश उदय, डॉ. रामसुधार सिंह, प्रभात झा, शिवकुमार पराग, डॉ. शशिकला पाण्डेय, हिमांशु उपाध्याय, कींद्र नारायण, ओम धीरज, डॉ. पवन कुमार शास्त्रा, सुरेंद्र वाजपेई, डॉ. अशोक कुमार सिंह, गौतम अरोड़ा सरस, डॉ. शरद श्रीवास्तव, वासुदेव उबेराय, डॉ. वत्सला, डॉ. ऊषा पाण्डेय कनक, डॉ. जया टण्डन, अशोक अज्ञान, मासूम, संतोष प्रीत, गिरिजेश तिवारी, योगेश चतुर्वेदी, डॉ. शुभंकर शास्त्रा, सिद्धनाथ शर्मा, ब्रजेश पाण्डेय, गिरीश पाण्डेय, विजयनाथ त्रिपाठी, मनोज वर्मा, देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, श्याम दुबे व अन्य उपस्थित थे। नरेंद्र नाथ मिश्र के धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।
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