अश्लीलता और सस्ती लोकप्रियता से दूरी

पत्रकारिता के गुणों में एक गुण मर्यादा भी है। प्रिंट मीडिया में समाचारों के साथ-साथ चित्रों का सामंजस्य भी होता है। इसलिए भाषा और चित्र के स्वरूप पर भी संयम और मर्यादा का ध्यान रखना अनिवार्य होता है। आज जब मीडिया ने डिजिटल क्षेत्र में कदम रखा है तो कई तरह की चुनौतियाँ और जोखिम सामने आये हैं, उनमें अश्लीलता भी एक है, जिसके प्रभाव में आकर लाखों युवाओं का जीवन बर्बाद हो रहा है।

ऐसे में हिन्दी मिलाप का यह सिद्धांत और अधिक प्रासंगिक हो गया है कि सस्ती लोकप्रियता के लिए अश्लील चित्र या साहित्य इसमें प्रकाशित नहीं होगा। हैदराबाद में अपने दौर के वरिष्ठ पत्रकार व प्रथम युद्धवीर पुरस्कार से सम्मानित कालीदास काशिकर ने जब मिलाप और युद्धवीर जी के बारे में कुछ शब्द बयान करने चाहे तो सबसे पहले उन्होंने यही याद दिलाया कि युद्धवीर जी अपने दैनिक में अश्लीलता के लिए कोई जगह नहीं रखते थे। सस्ती लोकप्रियता उनका ध्येय नहीं था।

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हिन्दी मिलाप उन सिद्धांतों पर हमेशा खड़ा रहा। ऐसे समय में भी जब देश के अधिकतर अख़बार अपने रंगीन पृष्ठों पर अश्लीलता को परोसते रहे, मिलाप ने सौंदर्य, श्रृंगार, फिल्म, फैशन और लाइफ स्टाइल की दुनिया का प्रतिनिधित्व भी पूरी मर्यादा के साथ किया और यह सिलसिला आज भी जारी है।

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